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संवारें जीवनशैली, नहीं सताएगा मधुमेह

संवारें जीवनशैली, नहीं सताएगा मधुमेह

डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी तेजी से फैल रही है। अगर आप भी इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं तो जीवनशैली में बदलाव करना आपके लिए जरूरी है। विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर यहां डायबिटीज से बचाव के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

केट जगत में ‘किंग ऑफ स्विंग’ कहे जाने वाले वसीम अकरम एक ऐसे तेज गेंदबाज थे, जिनकी स्विंग और तेजी से दुनिया के अच्छे-अच्छे बल्लेबाज दहल जाते थे। लेकिन जब वह महज 29 साल के थे और अपने करियर के शिखर पर थे, तब उनकी जिंदगी में आए एक ‘स्विंग’ ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। उन्हें पता चला कि वे मधुमेह से पीडित हैं। उन्हें जबर्दस्त झटका लगा, पर जल्दी ही इस झटके से उबर गए और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर खुद को मधुमेह से मुकाबले के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद उन्होंने करीब छह साल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला और कई रिकॉर्ड बनाए। उनका जीवन आज खासकर मधुमेह से पीडित लोगों के लिए लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। आइए उन्हीं की जुबानी जानते हैं, मधुमेह से उनके मुकाबले की कहानी-

1997 में मुझे पता चला कि मैं मधुमेह से पीडित हूं। मुझे लगा कि जिंदगी खत्म हो गई। मैं अब और क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगा। लेकिन पत्नी ने मेरी हिम्मत बंधाई। यह बस मानसिक अनुशासन है। आपके सामने बहुत सारे प्रलोभन होते हैं। मुझे हर रात बिरयानी, नान, कुलचा आदि खाने की इच्छा होती थी, लेकिन मैं इससे बचता हूं। मैंने तय किया कि कम खाना खाऊंगा। अब मेरे दिमाग ने खुद को इस तरह ढाल लिया है कि अगर मैं थोड़ा भी ज्यादा खाता हूं तो ऐसा लगता है कि मेरा पेट फूल रहा है। मुझे लगता है कि मैं उल्टी कर दूंगा, इसलिए मानसिक अनुशासन के साथ आप कुछ भी कर सकते हैं। यह सब शुरू में थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन जब आपने एक बार शुरू कर दिया तो आप स्वस्थ महसूस करना शुरू कर देंगे, सारी चीजें ठीक होने लगेंगी। सेहत सब कुछ है।

हिंदी-उर्दू में कहावत है- कम खाओ तो जिंदगी लंबी जाएगी। यह एक आदत है। उदाहरण के लिए मैं रात में रोटी नहीं खाता, क्योंकि इसमें ज्यादा कार्बोहाइड्रेट होते हैं। अगर मेरा मन करता है तो मैं आधी रोटी ले लेता हूं। अगर मैं चिकन टिक्का लेता हूं तो साथ में सलाद का एक बड़ा कटोरा भी होगा। फिर उसके बाद मैं अपना शुगर लेवल चेक करता हूं। मैंने अपने दिमाग को इन सबके लिए प्रशिक्षित किया है। मैं मांसाहार पसंद करता हूं, लेकिन घर हो या बाहर, थोड़ा ही खाता हूं। लंच के पहले मैं ताजी उबली सब्जियां लेता हूं। इससे मेरा पेट कमोबेस भर जाता है। इसके बाद मैं थोड़ा कुछ और ले लेता हूं। मैं कहीं भी होता हूं, ऐसा ही करता हूं। खाने के पहले कुछ ऐसी चीजें लेता हूं, जो सेहतमंद हों, जिनमें चीनी न हो। जब मैं सफर पर होता हूं, नियमित रूप से अपना शुगर चेक करता रहता हूं। हम जो भी खाते हैं, वह शुगर बन जाता है। जाहिर है, मीठी चीजों से शुगर ज्यादा बनता है, लेकिन रोटी, मीट, सलाद, इन सबमें भी कार्बोहाइट्रेड या ग्लूकोज होता है, इसलिए आप कम खाएंगे तो कम ग्लूकोज बनेगा और अग्नाशय (पैंक्रियाज) पर दबाव कम होगा।

मधुमेह रोगी के लिए व्यायाम बहुत जरूरी है। हमारे यहां कहा जाता है कि मधुमेह रोगी जल्दी थक जाते हैं, लेकिन क्यों? इसलिए कि उनका शुगर लेवल नियंत्रित नहीं रहता। जब आपका शुगर लेवल नियंत्रित नहीं रहता तो मांसपेशियों को ग्लूकोज की सही मात्रा नहीं मिल पाती और आप थकान महसूस करते हैं। मैं दिन में दो बार व्यायाम करता हूं। जब आप तनाव में होते हैं, स्वस्थ नहीं महसूस करते तो नियमित रूप से शुगर लेवल चेक करें। अगर आप बहुत ज्यादा खुश होते हैं तो भी इसमें उतार-चढ़ाव होता रहता है। आप मरीज हैं तो आपको डॉक्टर से ज्यादा जानना होगा, क्योंकि डॉंक्टर अपको ढेर सारे नीरस उपदेश देंगे- ये दवा लो, ये करो, ये मत करो। इसलिए जरूरी है कि आप मधुमेह के बारे में खुद जानकारी हासिल करें। जितना ज्यादा आप सीखेंगे, इसको ज्यादा अच्छी तरह से मैनेज कर पाएंगे। अगर रात के खाने के बाद शुगर लेवल थोड़ा ज्यादा होता है तो मैं आधा घंटा टहल लेता हूं। टहलने के बाद शुगर लेवल चेक करता हूं तो यह पहले से कम हो जाता है। 

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