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उदास न कर दे मौसमी अवसाद

उदास न कर दे मौसमी अवसाद

सर्दी आते ही कुछ लोग अवसाद की चपेट में आने लगते हैं। इस समस्या को मौसमी अवसाद कहते हैं। इसकी क्या वजह है और समाधान क्या है, बता रहे हैं मूलचंद मेडसिटी के इंस्टीटय़ूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड साइंस के कंसल्टेंट (साइकेट्री) डॉ. जीतेन्द्र नागपाल

मौसम ने करवट बदलने की आहट दे दी है और अपने साथ लाया है कई तरह की बीमारियां। असल में मौसम तो तय समय पर बदलने लगता है, लेकिन हम इन बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते। ऐसे में शरीर और मस्तिष्क इस मौसम के बदलाव से अनछुए नहीं रहते और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से पीडित होते हैं। इनमें से एक है मौसमी अवसाद या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी)।

क्या होता है मौसमी अवसाद
सर्दियां आने के साथ ही दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं, जिस कारण लोगों की दिनचर्या पर प्रभाव पड़ता है। इससे लोग निराशा, एकाकीपन, अरुचि, भूख कम लगने और नकारात्मक सोच की समस्याओं से ग्रस्त होने लगते हैं। इसे ही मौसमी अवसाद यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं।

क्यों होता है मौसमी अवसाद
सर्दी में दिन छोटे होने से मस्तिष्क के रसायन सेरोटोनिन और नोरएपिनेफ्राइन का बहाव तेज हो जाता है, जिस कारण लगभग हर व्यक्ति कहीं न कहीं इस अवसाद से प्रभावित होता है। दरअसल, हमारे शरीर में दो प्रकार के हार्मोन बनते हैं। पहला मेलाटोनिन, जो रात में बढ़ता है और दूसरा सेलाटोनिन, जो दिन में बढ़ता है। हमारे सिर में एक ग्रंथि होती है, जिसे पिनियल कहते हैं। यह मेलाटोनिन नामक पदार्थ का स्त्राव करता है। मेलाटोनिन के असंतुलन से नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जो मौसमी अवसाद का कारण बनती हैं।

क्या हैं लक्षण
सर्दियों में शारीरिक रासायनों का स्रव तेजी से होने लगता है, जिससे असंतुलन की स्थिति आ जाती है। इससे मरीज में चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगने, नींद और भूख में कमी, एकाग्रता की कमी, नकारात्मक सोच आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

इलाज है आसान
सम्पूर्ण चिकित्सा और रहन-सहन में बदलाव लाने से 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं, किंतु यदि मौसमी अवसाद का समय रहते इलाज न करवाया जाए तो व्यक्ति आजीवन इसका मरीज बना रह सकता है। इलाज के दौरान दवाओं, थेरेपी और काउंसिलिंग के माध्यम से मरीज के अवसाद को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। मौसमी अवसाद में जरूरत पड़ने पर फोटोथेरेपी और प्रोफीलेक्सिस का सुझाव भी दिया जाता है। ऐसे रोगियों में साइकोथेरेपी भी बेहतर परिणाम देती है और नकारात्मकता को कम किया जा सकता है।

खानपान सुधारें
सर्दी के मौसम में ज्यादा तली, मैदे और शक्कर वाली चीजों से परहेज करें। ब्रेड, चावल, शक्कर, आदि का सेवन कम करें। फल, हरी सब्जियों, सलाद का सेवन करें। खूब पानी पिएं।

व्यायाम के लिए समय निकालें
सर्दी में रोजाना कम-से-कम 20 मिनट का शारीरिक व्यायाम बहुत जरूरी है। अगर बाहर ज्यादा ठंड हो तो सुबह के बजाय शाम के समय सैर करने के लिए जाएं।

धूप में निकलें
सर्दियों में ली गई धूप न केवल शारीरिक रोगों से, बल्कि मानसिक रोगों से भी बचाव करती है।

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