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‘वर्षा पंप’ से करें खेतों की सिंचाई

‘वर्षा पंप’ से करें खेतों की सिंचाई

नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने खेतों की सिंचाई को बेहद आसान बनाने वाली तकनीक विकसित की है। उन्होंने ‘वर्षा’ पंप बनाया है, जिसे सिर्फ नदी या नहर में रखकर आसपास के खेतों की सिंचाई की जा सकती है। यूरोपीय संस्था क्लाइमेट-केआईसी की ओर से पंप को यूरोप की इस साल की सबसे बड़ी तकनीकी खोज का अवॉर्ड दिया गया। नीदरलैंड की कंपनी क्यूस्टा ने इसे बनाया है।

प्राचीन मिस्त्र जैसी तकनीक
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह बिल्कुल नया उपकरण है। हालांकि इसी तरह की डिजाइन वाले पंप का इस्तेमाल प्राचीन मिस्त्र में किया जाता था। नेपाल में बारिश को बर्षा कहते हैं। इस आधार पर ही पंप का नाम बर्षा रखा गया है। शोधकर्ताओं की मानें तो विकासशील देशों में यह तकनीक ज्यादा कारगर होगी। प्रदूषण न फैलाने के कारण यह पर्यावरण के भी अनुकूल होता है।

पानी की लहरों से चलता पंप
लहरों से टकराकर सिंचाई पंप का बड़ा सा पहिया घूमता है। यंत्र की संरचना ऐसी होती है कि इससे वायु का एक दबाव तैयार होता है। यह हवा का दबाव पानी को एक नली के जरिए खेतों तक पहुंचा देता है। नदी में पानी की रफ्तार जितनी तेज होती है, उतनी दूर तक के पानी जाता है। पहला वर्षा पंप इस साल नेपाल में लगाया गया था। अब एशिया, लैटिन अमेरिका व अफ्रीका में इसके निर्माण की तैयारी शुरू की जा रही है।

बढ़ेगा उत्पादन
05 गुना बढ़ाया जा सकता है फसल का उत्पादन
00 ईंधन या बिजली लगती है इस वर्षा पंप में
01 लीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से छोड़ता है पानी
82 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा सकता है पानी
01 साल में ही पंप की पूरी लागत हो जाती है वसूल

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