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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने किया शिलान्यास

केंद्रीय हिन्दी संस्थान में करीब 11 साल बाद वह मौका आया है जब संस्थान में एक अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सभागार की कमी पूरी होने जा रही है। इस अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक सभागार का केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने गुरुवार को शिलान्यास किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सभागार देश-दुनिया की संस्कृति और कला सहित शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर मंच साबित होगा। संस्थान परिसर में दोपहर करीब 12.30 बजे पहुंचीं स्मृति ईरानी ने सबसे पहले सभागार के भवन का पूजा-पाठ कर और नारियल फोड़कर शिलान्यास किया।


इसके बाद सभागार के नक्शे और मॉडल के चित्रों को देखते हुए उस पर लिखे हुए अंग्रेजी में विवरण पर केंद्रीय मंत्री ने पूछा हिन्दी संस्थान में हिन्दी का प्रयोग क्यों नहीं। इसके बाद मॉडल के स्वरूप पर एतराज जताते हुए का कि इसका स्वरूप कुछ स्वदेशी होना चाहिए, क्योंकि यह देखने में विदेशी इमारतों जैसा दिख रहा है। हिन्दी संस्थान के सांस्कृतिक सभागार में संस्कृति प्रतिबिंबित होनी चाहिए। इस पर उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका और अन्य अधिकारियों ने कहा कि इसके बाहरी स्वरूप को पिलरों और साज-सज्ज से भारतीय स्वरूप दिया जाएगा। भरतनाट्यम नृत्यांगना के स्टेच्यू या फिर अन्य कलाओं की झलक इसकी बनावट में दिखे, इसकी पूरी कोशिश करेंगे। स्मृति ईरानी के आने से संस्थान में खुशी का माहौल था। संस्थानकर्मियों ने बताया इससे पहले कृष्णा साही, एलपी साही, अजरुन सिंह और मुरली मनोहर जोशी आ चुके हैं।



आचमन करने में ठिठकीं
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक सभागार के शिलान्यास के दौरान पूजा करा रहे पंडित जी ने स्मृति ईरानी से आचमन करने को कहा। इस पर वे पानी मुंह में लेने से ठिठकीं। अगले ही पल अधिकारियों ने पंडित जी को इशारा किया तब पूजा का सिलसिला आगे बढ़ा।

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