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केंद्रीय हिन्दी शिक्षण समिति करेगी नियुक्ति और प्रमोशन पर फैसला

केंद्रीय हिन्दी शिक्षण मंडल की बैठक में केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में वर्ष 2014 की बैठक के कार्यवृत्त की संपुष्टि सहित वर्ष 2012,  2013, 2014 की वित्त समिति के कार्यवृत्त की संपुष्टि की गयी। वर्ष 2013 की विद्या सभा के कार्यवृत्त की संपुष्टि हुई। ऑडिट रिपोर्ट के अलावा पदों पर नियुक्ति व प्रमोशन के लिए शासी परिषद के तीन सदस्य मनोनीत किए, जिसमें एक मंत्रालय का सदस्य है। शैक्षिक वर्ग के पदों की नियुक्ति व प्रमोशन को पैनल गठित हुआ। प्रो. एचएस सोलंकी के डॉ. बीआर अंबेडकर विवि में दो वर्ष के लियन सहित प्रो. भरत सिंह के आईसीसीआर के जरिए विदेश में हिन्दी अध्यापन के लिए एक वर्ष विस्तार की भी संपुष्टि हुईं।


बैठक में उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका, निदेशक प्रो. मोहन, मानव संसाधन विकास मंत्रलय के उच्चतर शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (भाषाएं) सुखवीर सिंह संधू, संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार सत्यपाल शर्मा, उप सचिव (भाषाएं) पीके साहा, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा चेन्नई के दीनबंधु, प्रो. असगर वजाहत, डॉ. ऋचा शर्मा, प्रो. हेमराज मीणा थे। बैठक की अध्यक्षता करने के दौरान स्मृति ईरानी ने सबसे पहले छात्र-छात्रओं की समस्याओं पर चर्चा करते हुए उन्हें सुलझाने का आदेश दिया। करीब 15 मिनट संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिन्दी को लेकर विजन व सरकार की मंशा से अवगत कराया। बताते हैं वह बेहद जल्दी में दिखीं। बैठक में चाय तक नहीं पी।

आगरा के जाम से जूझना पड़ा केंद्रीय मंत्री तक को
आगरा। आगरा के जाम से आम आदमी से लेकर पर्यटक तो दो-चार होते ही हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को भी जाम से जूझना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक उन्हें संस्थान में 12 बजे पहुंचना था, वक्त के मुताबिक संस्थान में पहुंचे मंत्रलय के अधिकारी और केंहिंसं के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका, निदेशक प्रो. मोहन, कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी 12 बजे गेट पर बुके लेकर पहुँच गये, मगर स्मृति ईरानी करीब 12.30 बजे पहुंच सकीं। बताया जाता है एक्सप्रेस वे से संस्थान तक पहुंचने में काफी समय लग गया। बाईपास पर जाम लगा दिखा तो फ्लीट को अंबेडकर पुल से लाने की कवायद की गई। वहीं जब वे खंदारी चौराहे पर पहुंचीं तो उनका फ्लीट खंदारी कैंपस की ओर मुड़ गया। उन्हें एस्कोर्ट करके ला रहे पुलिसकर्मियों को जब उच्च अधिकारियों के निर्देश मिले तब कहीं जाकर वे केंद्रीय हिन्दी संस्थान पहुंचीं।  

छात्र-छात्राओं से मिलाया हाथ, तो खिले चेहरे
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक सभागार का शिलान्यास करने के बाद स्मृति ईरानी लाइन से खड़े गैर हिन्दी भाषी प्रदेशों के छात्र-छात्रओं की ओर बढ़ लीं। उन्होंने विद्यार्थियों से हाथ मिलाया और मुस्कुराकर बात की तो छात्र-छात्रओं के चेहरों पर मुस्कुराहट खिल गई। छात्र-छात्रएं उनका मोबाइल से फोटो लेते हुए और उनके साथ फोटो खिंचवाने की होड़ में दिखे। टीवी अदाकारा रहीं स्मृति ईरानी को देखकर पूवरेत्तर की कई छात्रएं अभिभूत हो उठीं। उन्होंने ग्रुप फोटो कराने का निवेदन किया, मगर केंद्रीय मंत्री व्यस्तता का हवाला देते हुए आगे बढ़ गईं।

कई प्रदेशों में संस्थान की डिग्रियों को मान्यता नहीं

केंद्रीय हिन्दी संस्थान की डिग्रियों को कई राज्य सरकारों द्वारा मान्यता नहीं दी जा रही है। प्रवीण, पारंगत, निष्णात करने वाले विद्यार्थियों को केंद्रीय विद्यालय या केंद्र सरकार के संस्थानों में नौकरी मिलती है। कई प्रदेशों में केंद्रीय हिन्दी संस्थान के विद्यार्थियों को नौकरी मिलने के बाद इसी वजह से नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उड़ीसा में प्रवीण को, पारंगत को अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल में मान्यता नहीं मिल पा रही है। छात्र-छात्रओं ने बताया मेहनत खराब हो रही है। यहाँ दो एक बजाय एक प्रैक्टिकल होता है, सोशल साइंस का प्रैक्टिकल नहीं होता है, डिग्रियों पर बीएड, एमएड, बीटीसी नहीं लिखने से नुकसान हो रहा।

एक ही कमरे के दो दरवाजों पर लगवा डालीं दो नेमप्लेट
संस्थान में निदेशक कक्ष के बगल में एक अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कमरा तैयार किया गया है। इस कमरे ने उस वक्त चौंकाया जब एक ही कमरे के दो दरवाजों पर दो अलग-अलग नेम प्लेट लगी दिखीं। पहले दरवाजे पर अध्यक्ष स्मृति ईरानी की नेम प्लेट लगी दिखी वहीं दूसरे गेट पर उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका की नेम प्लेट लगी थी।

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