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डीरेका में रात गुजारेंगे मोदी, सुबह करेंगे योगा

डीजल रेल इंजन कारखाना (डीरेका) एक बार फिर इतिहास दोहराने जा रहा है। इसकी आधारशिला प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 1956 में रखी थी। 58 सालों बाद फिर डीरेका ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां रात गुजारेंगे। डीरेका की हरियाली के बीच मार्निग वॉक व गोल्फ मैदान में योगा भी करेंगे।

सात नवम्बर की रात डीरेका के गेस्ट हाउस में उनके ठहरने का मुकम्मल इंतजाम किया जा चुका है। मोदी की सुरक्षा में लगी टीम गेस्ट हाउस को अपने कब्जे में ले चुकी है। यहां किसी भी डीरेकाकर्मी या अन्य बाहरी की आवाजाही पर प्रतिबंध लग चुका है। जब तक मोदी यहां रहेंगे सुरक्षा की कमान गेस्ट हाउस में एसपीजी और बाहर पैरामिलेट्री फोर्स, आरपीएफ संभालेगी। डीरेका के अंदर और बाहर जिला पुलिस भारी संख्या में रहेगी।


देश-दुनिया में डीजल इंजन देने का कीर्तिमान बनाने वाले डीरेका में यह पहला मौका है, जब बतौर  प्रधानमंत्री कोई यहां पहुंच रहा है। डीरेका का उद्घाटन 1964 में बतौर गृहमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। इसके बाद वह प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई समेत वीआईपी मूवमेंट के लिए डीरेका प्रसिद्ध रहा है। देश-विदेश से मेहमान पहुंचते हैं। इन्हें अधिकारी गेस्ट हाउस में ही ठहराया जाता है।

स्विमिंग पूल और  सोना बाथ भी
डीरेका के अधिकारी गेस्ट हाउस में 25 कमरें हैं। इनमें से किस कमरे में मोदी ठहरेंगे यह किसी को पता नहीं है। इसे पूरी तरह से गोपनीय रखा है। मोदी के कमरे के पास ही स्विमिंग पूल, जीम, सोना बाथ (भांप से स्नान), जैकुजी बाथ (गुनगुने पानी), टेनिस कोर्ट की व्यवस्था है।

गुजराती रसोइये बनाएंगे पकवान
मोदी के रात्रि विश्रम के दौरान उन्हें परोसे जाने वाले भोजन को गुजरात के ही रसोइये तैयार करेंगे। डीरेका अधिकारी गेस्ट हाउस के रसोइये को इससे दूर रखा जाएगा। डीरेका के पीआरओ प्रदीप कुमार के अनुसार फिलहाल, डीरेका के रसोइये और कर्मचारियों को गेस्ट हाउस से दूर रखा गया है। गुजरात के ही रसोइये किचन संभालेंगे।

एक झलक डीरेका
1961 : डीरेका की स्थापना अमेरिकन कम्पनी लोको मोटिव एल्को के सहयोग से हुई।
1964 : पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पहले लोको इंजन 2600 हास पॉवर का लोकार्पण किया।
1968: विदेशी बाजार में सबसे पहले तंजानिया और वियतनाम को इंजन बेचा गया।
7000: इंजन अब तक देश और विदेश में बेच चुका है डीरेका।
300: लोको इंजन हर साल बनाने का लक्ष्य है डीरेका का।
15 करोड़ : है डीरेका निर्मित एक लोको इंजन की अनुमानित कीमत ।
इन देशों में दौड़ रहा इंजन
सुडान, सेनेगल, मोजाम्बिक, श्रीलंका, तंजानिया, बांग्लादेश, मलेशिया
वियतनाम, म्यांमार
यहां आ चुके रेलमंत्री
एचसी डाससप्पा, टीएन पाइ, मधु दंडवते, कमलापति त्रिपाठी, माधव राव सिंधिया, राम सुभाग सिंह
गुलजारी लाल नंदा, जाफर शरीफ, नीतिश कुमार, लालू प्रसाद यादव, राम नाइक, मल्लिकाजरुन खड़गे

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