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डीआरडीओ सतह और समुद्र से छोड़ेगा चार मिसाइलें

डीआरडीओ सतह और समुद्र से छोड़ेगा चार मिसाइलें

रक्षा संबंधी तैयारियों को चाक-चौबंद रखने के लिए इस महीने देश में बड़े पैमाने पर मिसाइलों के यूजर ट्रायल किए जाएंगे। इस कड़े में चार मिसाइलें छोड़ी जाएंगी। इनमें से ज्यादातर मिसाइलें पहले से ही सेनाओं की सेवा में हैं। ये सभी मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं। इनका परीक्षण शक्ति एवं क्षमता को परखने के लिए किया जा रहा है।
 
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस संबंध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद डीआरडीओ परीक्षण की तैयारियों में जुट गया है। सूत्रों के अनुसार जिन चार मिसाइलों के यूजर ट्रायल होने हैं, उनमें अग्नि-2, अग्नि-4, पृथ्वी तथा धनुष मिसाइलें हैं। धनुष मिसाइल को बंगाल की खाड़ी या उड़ीसा तट से नौसेना के जहाज से छोडम जाएगा जबकि बाकी तीन मिसाइलों का परीक्षण ह्वीलर द्वीप से होगा।

तैयारियों का जाजया लेना है मकसद-रक्षा सूत्रों के अनुसार ये चारों मिसाइलें पहले ही सफल हो चुकी हैं। इनमें अग्नि-4 को छोड़कर बाकी तीनों मिसाइलें सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल की जा चुकी हैं। इन मिसाइलों के कई खेपें बनकर तैयार हैं। यूजर ट्रायल के दौरान खेपों में से किसी एक मिसाइल को उठाकर उसका परीक्षण किया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि वह सही स्थिति में मौजूद है। मकसद मिसाइल के परीक्षण तक सीमित नहीं होता बल्कि मिसाइल लांच करने के पूरे सिस्टम को जांचने के लिए होता है। एक प्रकार से यह एक अभ्यास है।

कौन-कौन सी मिसाइलों के होंगे परीक्षण
पृथ्वी-सतह से सतह में मार करने वाली पृथ्वी मिसाइल की खूबी यह है कि तीनों सेनाएं नौसेना, वायुसेना और थल सेना इसका इस्तेमाल कर रही हैं। सेना के पास जो पृथ्वी मिसाइल हैं, वह 150 किमी तक मार कर सकती हैं तथा एक हजार किग्रा तक हथियार ले जा सकती हैं। जबकि वायुसेना संस्करण की क्षमता 250 तथा नौसेना संस्करण की क्षमता 350 किमी तक मार करने की है। 1994 में इसे सेना में शामिल किया गया था।

धनुष-यह पृथ्वी मिसाइल का ही आधुनिक संस्करण है जो विशेष रूप से नौसेना के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। इसे समुद्र में जहाज से भी छोडम जा सकता है। इसमें 500 किग्रा तक के हथियार ले जाने की क्षमता है तथा 350 किमी तक मार करने में समक्ष है। मूलत यह दुश्मन के जहाजों को उडमने के लिए बनाए गई है। लेकिन समुद्र से सतह पर भी इससे निशाना लगाया जा सकता है।

अग्नि-2-यह थेल सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार की गई थी। यह मीडियम रेंज बेलेस्टिक रेंज मिसाइल (एमआरबीएम) है जो 2000 किमी तक हमला करने में समक्ष है तथा एक हजार किग्रा वजन के हथियार ले जाने में समक्ष है। सेना में 1999 में इसे शामिल किया गया था।

अग्नि-4- यह अग्नि का आधुनिक संस्करण है तथा 4000 किमी तक मार करने में समक्ष है। हालांकि इसे परीक्षण सफल हो चुके हैं लेकिन इसे सेना में अभी शामिल नहीं किया जा सका है। हालांकि प्रक्रिया अब पूरी होने को है। इसे भारतीय सेना के लिए इस्तेमाल किया गया है।

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