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हरियाणा बोर्ड के खराब प्रदर्शन से बढ़ी अभिभावकों की चिंता

हरियाणा बोर्ड के पहले सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम ने बोर्ड से संबद्धित स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावक की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में प्रदर्शन के आधार  पर फरीदाबाद की शर्मनाक स्थिति को देखकर बोर्ड के स्कूलों में शिक्षा के गिरते हुए स्तर को आंका जा सकता है। गौरतलब है कि सीनियर सेकेंडरी की परीक्षा में फरीदाबाद सबसे निचले 21वें नंबर पर रहा है। वहीं सेकेंडरी की बात करें तो फरीदाबाद 13वे नंबर पर ही जगह बना पाया है। ऐसे में अभिभावकों की चिंता बढ़ना लाजिमी है। वहीं इस निराशाजनक परीक्षा परिणाम ने सरकार द्वारा शिक्षा का स्तर सुधारने के तमाम दावों को मुंह चुढ़ाते हुए असलियत भी बयां कर दी है।

क्लास रेडीनेस प्रोग्राम हों, सिमेस्टर सिस्टम प्रणाली या फिर तकनीकी जानकारी..शिक्षा  की गुणवत्ता में सुधार के नाम पर तमाम योजनाएं तो शुरू की गई हैं, मगर इनका लाभ होता दिखाई नहीं पड़ता। निजी स्कूलों में वक्त के साथ कदमताल करते हुए इंटरनेट, कंप्यूटर और नई तकनीक पर जोर दिया जाता है। वहीं, सरकारी स्कूलों में शिक्षा निदेशालय ने कई कदम उठाए, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई। मेवात जैसे पिछड़े इलाके ने भी एजुकेशन हब कहे जाने वाले फरीदाबाद को पछाड़ दिया है। शिक्षा का स्तर सुधारने के नाम पर करोड़ों का बजट तो जारी किया जा रहा, मगर इसका फायदा छात्रों को होता नहीं दिखता।

छात्रओं ने फरीदाबाद को पछाड़ा
परीक्षा में छात्रों का खराब प्रदर्शन भी परीक्षा परिणाम के पिछड़ने की वजह मान सकते हैं। अगर प्रदेश की बात करें तो सीनियर सेकेंडरी में जहां छात्रों के मुकाबले 13.92 फीसदी  ज्यादा छात्रएं सफल रही हैं। वहीं सेकेंडरी में छात्रओं का परीक्षा परिणाम छात्रों के मुकाबले 4.68 फीसदी बेहतर रहा है। ऐसे में साफ है कि छात्रों ने परीक्षा परिणाम में असफलता का आंकड़ा बढ़ाया है। फरीदाबाद में सीनियर सेकेंडरी का परीक्षा परिणाम    52.17 फीसदी रहा। परीक्षा में कुल 14183 परीक्षार्थी शामिल हुए थे और 7399 सफल रहे। इसमें 8178 छात्रों में से मात्र 3907 ने सफलता पाई। जबकि छात्रओं की संख्या 6005 थी, जिनमें से 3492 छात्रएं सफल रहीं।  

किताबों व शिक्षकों की कमी
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके अलावा कई स्कूलों में तो किताबें तक नहीं पहुंची हैं।  जिले में 47 वरिष्ठ माध्यमिक, 52 उच्चतर माध्यमिक, 147 माध्यमिक तथा 386 प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें मुख्य अध्यापक, मुखिया के  लेरार के कई पद खाली पड़े हैं।

पढ़ाई से ज्यादा गतिविधियां हुईं हावी
सरकारी स्कूलों में कोर्स से ज्यादा ध्यान अतिरिक्त गतिविधियों, विभिन्न समारोहों, कार्यक्रमों में दिया जाने लगा है। सत्र की शुरुआत से ही गतिविधियां कोर्स पर हावी होती रही हैं। आधिकारिक तौर पर मार्च से सत्र की शुरुआत क्लास रेडीनेस प्रोग्राम (सीआरपी) से हुई। इसके तहत गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने तक स्कूल में पढ़ाई के बजाय तमाम गतिविधियां कराई गई। इसके बाद तमाम जयंतियां, जागरूकता अभियान, वार्षिकोत्सव समारोह, खेल समारोह आदि में भी शिक्षक व छात्र मशगूल रहे।

गैर शैक्षणिक कार्यो में व्यस्तता है वजह
शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यो में व्यस्तता भी पढ़ाई नहीं होने की मुख्य वजह है। इनमें चुनावी डय़ूटी, बीएलओ डय़ूटी, जनगणना डय़ूटी, सिविल कार्य, मार्किग डय़ूटी जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।
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ये योजनाएं हुईं धराशाही
नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा प्रदेश सरकार ने 2006 में राज्य के सभी स्कूलों में छठीं से 12वीं तक के छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए योजना शुरू की थी। इसके तहत तकरीबन 1240 सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर दिए गए। लेकिन अभी तक सरकारी स्कूलों के लाखों बच्चाों को कंप्यूटर शिक्षक का इंतजार है।

डीटीएच और एजुसेट सिस्टम भी फेल
डिस्टेंस एजुकेशन प्रोग्राम के लिए इसरो और भारत इलेक्ट्रोनिक्स के साथ मिलकर
2007 में राजकीय स्कूलों के छात्रों को मुख्यालय से विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाने के लिए एजुसेट व डीटीएच सिस्टम शुरू किया गया था। मौजूदा समय में डीटीएच और एजुसेट सिस्टम ठप पड़े हैं।

आईसीटी स्कीम
छात्रों में कंप्यूटर शिक्षा बढ़ाने के लिए 2004-5 में इंफोर्मेशन एंड टेकAोलॉजी स्कीम लागू की गई। करोड़ों खर्च कर प्रदेश के स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के लिए कंप्यूटर लैब तैयार करा दी गई, लेकिन कंप्यूटर शिक्षक नहीं होने की वजह से कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं।

सिमेस्टर सिस्टम
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कक्षा 6 से 12वीं तक 2005 में सिमेस्टर सिस्टम लागू किया गया। मगर इसका असर नकारात्मक पड़ता दिख रहा है।  

प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निग
छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए 2008-09 में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निग लागू किया गया। सीसीई के तहत प्रोजेक्ट आदि पर ध्यान देने की शुरुआत हुई। इसका भी कोई लाभ नहीं दिखता।

अधिकारियों की बात
फरीदाबाद के सभी स्कूलों से परीक्षा परिणाम की सूची मांगी गई है। सभी स्कूलों के परिणाम पर बैठक कर समीक्षा की जाएगी। जिन स्कूलों के खराब प्रदर्शन की वजह से फरीदाबाद पिछड़ा है शिक्षा विभाग को उनकी जानकारी देकर सुधार के सख्त निर्देश दिए जाएंगे।
राजीव कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी
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फरीदाबाद का पिछड़ना शर्मनाक
फरीदाबाद का परीक्षा परिणाम में बुरी तरह पिछड़ना शर्मनाक है। शिक्षा का स्तर सुधारने के नाम पर शिक्षा विभाग ने तमाम योजनाएं जारी की हैं, इसके बावजूद परीक्षा परिणाम चिंताजनक रहा है। शिक्षकों की लापरवाही और विभागों की गैर जिम्मेदारी इसकी बड़ी वजह है। सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चाों के अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा अधिकारियों को कड़े फैसले करने चाहिए।
कैलाश शर्मा, प्रदेश महासचिव, हरियाणा अभिभावक एकता मंच

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