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दिल्ली चली चुनाव में

महज एक साल के भीतर दिल्ली के मतदाताओं और नागरिकों पर विधानसभा चुनाव का भार फिर से आन पडम है। इसके लिए कौन दोषी है? आम आदमी पार्टी, भाजपा या कांग्रेस या फिर दिल्ली के मतदाता, जिन्होंने खंडित जनादेश दिया? इसका जवाब दिल्ली के वोटर खुद से मांगें? इसमें कोई दोराय नहीं हो सकती कि चुनाव पूर्व की शीला सरकार ने दिल्ली के विकास के लिए जबर्दस्त काम किया था और चुनाव में उसकी जो दुर्गति हुई थी, उसमें उसके खिलाफ कम, केंद्र की सरकार के खिलाफ नाराजगी बहुत अधिक थी। उसके बाद से एक साल तक दिल्ली के लोग अपने विधायकों की ड्रामेबाजी ही अधिक देखते रहे। इसलिए अब मौका आया है कि वे इस बार स्पष्ट जनादेश के लिए वोट करें। जिस किसी भी दल में उनका भरोसा है, उसे मुकम्मल तौर पर सत्ता की चाबी सौंपे। लेकिन मेरी राय में विपक्ष को भी इतनी ताकत जरूर दें कि वह सरकार को तानाशाह बनने से रोके। लोकतंत्र में विपक्ष की मजबूती बहुत जरूरी है।
अवधेश राय
गाजियाबाद, दिल्ली

स्वच्छ भारत का सपना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत जोर-शोर से स्वच्छ भारत, श्रेष्ठ भारत के नारे के साथ स्वच्छता अभियान प्रारंभ तो किया, लेकिन क्या अकेले उनके प्रयास से यह अभियान सफल हो पाएगा? छोटे-बड़े सभी शहरों के धन्ना सेठों, नेताओं और नौकरशाहों ने अपने-अपने घरों में भिन्न-भिन्न नस्ल के कुत्ते पाले हुए हैं, जिनको सुबह-शाम घुमाने के लिए परिवार के सदस्य या नौकर सडम्कों-गलियों में ले जाते हैं और सडम्क-गली में ये पालतू कुत्ते यहां-वहां मल-मूत्र त्याग करते हैं। आवारा कुत्तों पर तो वैसे भी किसी का नियंत्रण नहीं है। इसी तरह, सडम्कों पर फैले तंबाकू-गुटकों के पाउच और सिगरेट-बीड़ी के टुकड़े और प्लास्टिक की थैलियां नालियों में पहुंचकर उन्हें बंद कर देती हैं। मवेशियों के गोबर पशुपालकों के संवेदनहीन होने का प्रमाण देते हैं। इसलिए शुष्क भाषणों से काम नहीं चलेगा, जब तक गंदगी फैलाना दंडनीय अपराध घोषित नहीं होगा, तब तक स्वच्छ भारत एक सपना            ही रहेगा।
रचना दुबलिश, मेरठ

कृषि शिक्षा का महत्व
सीबीएसई के अलावा कई राज्यों के स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कृषि को पाठय़क्रम में शामिल किया है। वैकल्पिक विषय होने के अलावा बागवानी के रूप में भी कृषि वोकेशनल कोर्स में मौजूद है। मगर हायर सेकेंडरी स्तर पर दो फीसदी से भी कम छात्र कृषि की पढमई करते हैं। यदि कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलनी है, तो हाई स्कूल स्तर पर पाठय़क्रम में कृषि की पढमई को केंद्र में लाना होगा। आज हायर सेकेंडरी स्तर पर वही लोग कृषि की पढमई करते हैं, जिन्हें कॉलेज में इसकी पढमई करनी होती है। हायर सेकेंडरी स्तर पर अच्छे पाठ्यक्रम, रोजगारपरक प्रैक्टिकल के साथ इस विषय की पढमई कराई जाए, तो कृषि के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाएगी। कृषि शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी कोशिशों के अलावा जनमत बनाने की भी जरूरत होगी। सरकार विशेष किसान टीवी चैनल शुरू करने जा रही है। दूरदर्शन और रेडियो के अलावा टोल फ्री नंबर पर कृषि जानकारी सरकार उपलब्ध करा ही रही है। लेकिन सबसे बडम्ी चुनौती यह है कि इसका लक्ष्य समूह इन जानकारियों का समुचित लाभ नहीं ले पा रहा।
सुभाष बुडमवन वाला
वेदव्यास, रतलाम, मध्य प्रदेश़

कहां हैं बाबा रामदेव
काले धन के सवाल पर पूरे देश को मथने वाले बाबा रामदेव आजकल चुप-चुप से हैं। मीडिया भी उन्हें नहीं ढूंढम् पा रहा और कभी वह मिलते भी हैं, तो उनसे काला धन के बारे में सवाल नहीं पूछ पा रहा कि बाबा आप तो सबके खाते में लाखों रुपये डलवा रहे थे, कहां हैं वे रुपये? बाबा रामदेव की विश्वसनीयता तो उसी दिन खत्म हो गई थी, जब गेरुआ वस्त्र छोडम् उन्होंने सफेद सलवार-कुर्ती की शरण ली थी। आखिर देश को गुमराह करके उन्हें क्या मिला?
मोहन मुंडा, रातू रोड, रांची

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