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पुरस्कार के बाद फीकी पड़ जाती है गांवों की चमक

स्वच्छ हरियाणा-स्वच्छ भारत अभियान से पहले जिले में निर्मल भारत अभियान जोर-शोर से चलाया गया। जिसके तहत जिले की दस ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पंचायत का राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। यह पुरस्कार प्राप्त करने के लिए नियम सख्त रहे हैं। हिन्दुस्तान ने ऐसे ही एक पुरस्कृत गांव मिर्जापुर की पड़ताल की तो पाया कि गांव अपना पुरस्कार वाला रुतबा कायम नहीं रख पा रहा। मानकों पर खरा उतरने की चमक कुछ फीकी पड़ रही है।
    
निर्मल ग्राम पंचायत मिर्जापुर को वर्ष 2010 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सम्मान के चार साल बाद गांव में बढ़ी आबादी और अलग होते परिवारों के बाद काफी घरों में शौचालय नहीं है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। गांव में घुसते ही सामुदायिक केंद्र के पास सड़क पर कुड़ा दिखाई दिया। केंद्र के अंदर गए तो एक खुले कमरे में कुछ मजदूर सोते दिखाई दिए। समय 11.50 बजे हैं, गांव में कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा। गांव के रास्ते सीसी ब्लॉक की उबड़-खाबड़ सड़क से गुजरते हुए गांव में एक बरामदे में बैठे चार-पांच बुजुर्ग ताश खेलने में मग्न हैं, उनमें से कुछ ने बातचीत में गांव में हुए विकास कार्यो को लेकर खुशी जाहिर करते हैं, जबकि साफ-सफाई के लिए एक-दूसरे को जिम्मेवार ठहराते रहे। आगे चलते तो गांव की सिमेंटेड सड़कें विकास की कहानी खुद बयां करती दिखी। लेकिन अंदर की गलियों में जगह-जगह कूड़ा फैला हुआ है। गांव के दूसरे कोने पर कूड़े के ढेर नजर आए। गांव के दूसरे कोने पर एक मकान के पास ईटों के चट्टो के बीच प्लास्टिक की बोतले रखी दिखाई दी। बातचीत में लोगों ने बताया कि इन बोतलों में पानी भरकर लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। हमे यह सुनकर अचंभा हुआ कि यह तो निर्मल पुरस्कृत गांव है। लोगों ने काफी घरों में शौचालय नहीं है। दरअसल गांव शहर के निकट है और जमीन अधिग्रहण हो चुकी है। ऐसे में अब गांव में खेती नहीं है, अधिकांश लोग औद्योगिक क्षेत्र में काम के लिए जाते हैं।

निर्मल ग्राम पंचायत पुरस्कार के मानक
-सभी घरों में शौचालय हों
-स्कूल और आंगनवाड़ी में पर्याप्त शौचालय हों
-गांव का कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाता हो
-पानी निकासी का उचित प्रबंध हो
-साफ-सफाईका पर्याप्त इंतजाम हो
-ठोस व तरल कचरा प्रबंधन का इंतजाम हो
-लोग सफाई के बारे में जागरूक हो
-पहले जिला प्रशासन की टीम निरीक्षण करती है
-जिला प्रशासन की सिफारिश पर केंद्र सरकार की टीम निरीक्षण करती है
-फिर किसी समारोह में पुरस्कार दिया जाता है
-पुरस्कार राशि आबादी के मुताबिक पचास हजार से पांच लाख तक है
इन गांवों को मिल चुका है निर्मल पंचायत का राष्ट्रपति पुरस्कार
मिर्जापुर, तजोपुर, फत्तुपुरा, सुनपेड़, ददसिया, राजपुर कलां, बदरपुर सैद, खेड़ी गुजरान व लालपुर
हिन्दुस्तान सुझाव
-सांसद आदर्श गांव योजना में इन गांवों से सबक ले सकते हैं
-सभी घरों में शौचालय हों
-खुले में शौच न जाएं
-गांवों में भी पर्याप्त सफाई कर्मचारी नियुक्त हों
-सभी गांवों में कूड़ा प्रबंधन केंद्र बने
-सभी व्यक्ति सफाई के लिए खुद को तैयार करें
-कूड़ेदान में ही कूड़ा डाले
-कूड़े को घर में ढ़ककर कर रखें
-नाली में कूड़ा न डाले
-जनसमुदाय स्वच्छता की आदत डाले
-गांव के सभी लोग स्वच्छता के प्रति जागरूक हों
-पौधारोपरण करें
-सुलभ शौचालय का निर्माण करे
-सरकारे इसमें मदद करें

प्रतिक्रिया:
श्यामवती देवी, सरपंच, मिर्जापुर ग्राम पंचायत: मैंने गांव को आदर्श बनाए रखने के लिए पूरा प्रयास किया है। कभी सरकारी स्तर पर चूक तो कई बार में भी तालमेल की कमी के चलते कुछ कमिया हैं।  कुछ घरों में टायलेट बनाए जाने हैं। साफ-सफाई बहुत जरूरी है। मैं स्वयं महिलाओं को जागरूक कर रही हूं।
अजित यादव, ग्रामवासी: गांव में सफाई अभियान तो चलाया गया, लेकिन कूड़ा कई जगह छोड़ गए। लोगों को स्वयं ही साफ-सफाई के लिए जागरूक होना पड़ेगा। सफाई अभियान नहीं बल्कि प्रतिदिन जरूरी कार्य समझकर करना चाहिए।
धीरज यादव, प्रतिनिधि: हमारी पंचायत को वर्ष 2010 निर्मल गांव का राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। उस समय गांव मानकों पर खरा उतरा था, बीच में कुछ अधिकारियों की कौताही के चलते कुछ काम धीमे हो गए। गांव में आबादी बढ़ी तो कुछ घरों को अभी टॉयलेट की जरूरत है।
सोहनसिंह, ग्रामवासी: गलियां तो सभी शहर की तरह बन गई हैं। सफाई पर और ध्यान देने की जरूरत है। यह काम अब गांव के सभी लोगों को सामूहिक रूप से लेना होगा। बीते कुछ सालों में गांव में विकास हुआ है। लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है।

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