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दिलचस्प है राजीवनगर के बसने की कहानी

कालोनी के तौर पर राजीवनगर के बसने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। वर्ष 1में किसानों से लगभग 1024.52 एकड़ जमीन राज्य आवास बोर्ड ने अधिग्रहित किया था। बाद में किसानों व बोर्ड के बीच मुआवजे की राशि को लेकर लंबे समय तक विवाद चला। मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने पूरी कालोनी को ही अवैध रूप से बसा माना।ड्ढr कालोनी की जमीन पर राज्य में रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गयी थी। बाद में मुआवजे की राशि नहीं मिलने पर किसानों ने बोर्ड द्वारा अधिग्रहित जमीन बेचनी शुरू कर दी। सैकड़ों लोगों ने किसानों से जमीन खरीद घर बनाना शुरू कर दिया। अपने राज्य में रजिस्ट्री बंद रहने से बाहर जाकर जमीन की रजिस्ट्री करवायी जाती रही। देखते ही देखते पूरी कालोनी बस गयी। वर्ष 2000 में देश के किसी भी हिस्से में जमीन की रजिस्ट्री कराने पर रोक लगा दी गयी। इसके बावजूद लोगों ने चोरी-छिपे मकान बनाना नहीं छोड़ा। दूसरी ओर कोर्ट के फैसले को अमलीजामा पहनाने गयी पुलिस प्रशासन को स्थानीय लोगों के जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि पटना हाईकोर्ट के इस फैसले पर कि सरकार वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती है, सरकार ने कालोनी में बने मकानों को वैध करने की तैयारी की है। कई मोहल्लों में रही बिजली गुलड्ढr पटना (का.सं.)। बुधवार को लोड बढ़ जाने से ट्रिपिंग की समस्या से भी परेशानी बढ़ गयी है। मछुआ टोली फीडर लगभग दो घंटे तक बाधित रहा। राजेन्द्ननगर गोलंबर के पास 33 केवीए तार के गार्डवायर गिर गया जिससे शाम 5 से 7 बजे तक आपूर्ति बाधित रही। बाद में यह गड़बड़ी दूर हुई तो लोड बढ़ जाने से ट्रिप होने लगी। इसके बाद पेसू कंट्रोलरूम के निर्देश पर एक घंटे की लोडशेडिंग की गयी। नतीजतन नाला रोड, भिखना पहाड़ी, मुसल्लहपुर, सैदपुर,नंदनगर कालोनी व राजेन्द्रनगर के कुछ हिस्सों में दो से तीन घंटे तक लोग बिजली के लिए हलकान रहे। दूसरी ओर पश्चिम भाग के मोहल्लों में सुबह व शाम के वक्त लोग ट्रिपिंग की समस्या से हलकान रहे। उधर मीठापुर व जक्कनपुर ग्रिड से शाम में एक से डेढ़ घंटे के लिए लोडशेडिंग की गयी। हालांकि पेसू के जीएम राजनाथ सिंह ने दावा किया कि आपूर्ति सामान्य रही।

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