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सचिन ने ‘प्लेइंग इट माई वे’ का विमोचन किया

सचिन ने ‘प्लेइंग इट माई वे’ का विमोचन किया

महान भारतीय बल्लेबाज और ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर ने बुधवार को एक भव्य समारोह में कई दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ियों की उपस्थिति में अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माई वे’ का विमोचन किया।

क्रिकेट विशेषज्ञ हर्षा भोगले ने कार्यक्रम की मेजबानी की और मंच पर मौजूद दिग्गज खिलाडियों सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, वासु परांजपे के अलावा सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वी.वी. एस. लक्ष्मण और खुद तेंदुलकर के साथ उनके जीवन और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर बातचीत की।

क्रिकेट के सभी प्ररूपों से पिछले साल संन्यास ले चुके इस दिग्गज खिलाड़ी ने विमोचन कार्यक्रम से कुछ देर पहले किताब की पहली प्रति अपनी मां को भेंट की।

सचिन ने इसकी जानकारी सोशल वेबसाइट ट्विटर के जरिए दी। साथ ही सचिन ने मां को किताब भेंट करते हुए अपनी एक तस्वीर भी ट्विटर पर साझा की। किताब की दूसरी प्रति सचिन ने अपने पहले कोच रमाकांत आचरेकर को भेंट की जो विमोचन के समय मंच पर मौजूद थे।

इस अवसर पर तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यह पुस्तक मेरे लिए एक अलग तरह की पारी के समान है, जिस पर मैं पिछले तीन वर्षों से काम कर रहा था। अपने खेल की ही तरह मैंने इस पुस्तक में अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं का ईमानदारी के साथ वर्णन किया है। उम्मीद करता हूं पाठक इस पुस्तक का लुत्फ उठाएंगे।’’

उल्लेखनीय है कि सचिन की किताब के कुछ अंशों का पहले ही खुलासा हो जाने से पुस्तक ने पहले ही काफी चर्चा बटोर ली है। खासकर पूर्व कोच ग्रैग चैपल से जुड़े विषय ने सबका ध्यान आकर्षित किया। सचिन ने इस किताब में अपने करियर के कई कहे-अनकहे लम्हों को शामिल किया है।

हैचेट इंडिया द्वारा प्रकाशित सचिन की इस आत्मकथा ने रिलीज के पहले ही दिन हार्डबैक पुस्तक की बिक्री के भारत में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पुस्तक की हार्डबैक प्रति की एक लाख प्रतियां रिलीज की गई हैं।

हार्डबैक के अलावा सचिन की इस आत्मकथा का ईबुक संस्करण गुरुवार को रिलीज होगा। पुस्तक का मराठी, हिंदी, गुजराती, मलयालम और बांग्ला जैसी विभिन्न भारतीय भाषाओं में ऑडियो संस्करण भी अगले वर्ष के शुरुआत में रिलीज हो जाएगा।

सचिन ने किताब की पहली प्रति मां को भेंट की

महान भारतीय बल्लेबाज और ‘भारत रत्न’ सचिन तेंदुलकर ने बुधवार को अपनी जीवनी ‘प्लेइंग इट माई वे’ की पहली प्रति अपनी मां रजनी को बुधवार को भेंट की। सचिन ने इसकी जानकारी सोशल वेबसाइट ट्विटर के जरिए दी। साथ ही सचिन ने मां को किताब भेंट करते हुए अपनी एक तस्वीर भी ट्विटर पर साझा की।

तेंदुलकर ने सहयोग के लिए मीडिया की सराहना की
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 वर्षों के शानदार करियर के दौरान कई बार नाकाम रहने पर मीडिया की आलोचना झेलने वाले महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने स्कूल के दिनों से ही एक क्रिकेटर के तौर पर मिले सहयोग के लिए मीडिया की सराहना की है।
    
तेंदुलकर ने कहा, मेरा मानना है कि जबसे मैं भारत के लिए खेल रहा हूं तब से ही नहीं, बल्कि स्कूल के दिनों से ही मुझे मीडिया का सहयोग मिला। मुझे याद है कि जब मैंने अपना पहला शतक लगाया था तो उस पर लेख लिखा गया।
    
उन्होंने शुरुआती दिनों का एक वाकया बयां करते हुए कहा, मुझे याद है कि पहली बार मेरा नाम अखबार में तब छपा जब मेरा स्कोर 24 रन था। स्कोर शीट निकालने और सभी अखबारों को देने वाले एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि अगर तुम अपने स्कोर में छह रन और जोड़ दो तो तुम्हारा नाम अखबारों में आ जाएगा।
    
मास्टर ब्लास्टर ने कहा, यह मेरी जिंदगी का पहला मैच था और मैं नहीं जानता कि मैं क्या हूं। ऐसे में मैंने उससे कहा था कि अगर आप सोचते हैं कि यह सही है तो कर दीजिए और उसने ऐसा ही किया। परंतु मेरे सर रमाकांत अचरेकर ने मुझे पकड़ लिया और यह मेरी जिंदगी का बड़ा सबक था। सर ने मुझे बताया कि अगर तुम अपना नाम अखबार में देखना चाहते तो बेहतर होगा कि रन बनाओ।

कप्तानी से तेंदुलकर पर पड़ा था असर

सचिन तेंदुलकर ने भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी इसलिए छोड़ी क्योंकि टीम की अगुआई करने का दबाव व्यक्तिगत रूप में उन्हें प्रभावित कर रहा था और वह अपने परिवार के साथ मौजूद रहने के दौरान इससे अलग नहीं हो पार रहे थे।
     
तेंदुलकर ने कहा कि इसलिए मुझे लगा कि अगर एक खिलाड़ी के रूप में मैं योगदान दे पाउं और अगले कप्तान को सुझाव दूं। बल्लेबाज के रूप में शानदार सफलता के बावजूद कप्तान के रूप में विफलता के बारे में पूछने पर तेंदुलकर ने कहा कि लोगों को इसके लिए तब के स्कोरबोर्ड देखने होंगे।
     
उन्होंने कहा, मैंने कभी उन खिलाड़ियों की आलोचना करने पर विश्वास नहीं किया जिनके साथ मैं खेला। यह गलत है। अगर आप तब के स्कोरबोर्ड देखो को यह काफी स्पष्टीकरण दे देंगे।
     
तेंदुलकर ने कहा, जब हम भारत में खेले तो हमने दक्षिण अफ्रीका को हराया, हमने ऑस्ट्रेलिया को हराया, इसलिए हमें सफलता मिली लेकिन मुझे लगता है कि दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज और कुछ अन्य मौकों पर ऐसे मैच थे जिनके बारे में मुझे लगता है कि हमें जीतना चाहिए था। यह बड़ी निराशा है कि हम इन्हें अपने पक्ष में नहीं कर पाए।

चैपल ने जब कप्तानी की पेशकश की तब अंजलि भी वहां थी
बल्लेबाजी के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने ग्रेग चैपल की आलोचना पर अडिग रहते हुए दावा किया कि जब इस पूर्व भारतीय कोच ने विश्व कप 2007 से पहले राहुल द्रविड़ को हटाकर उनके स्थान पर उन्हें कप्तान बनाने की पेशकश की थी तब उनकी पत्नी अंजलि भी वहां मौजूद थी।

उन्होंने कहा, अंजलि तब मेरे साथ थी इसलिए मुझे ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है। तेंदुलकर ने चैपल को अपने विचार थोपने के लिये रिंगमास्टर करार दिया था, उन्होंने इस स्टार बल्लेबाज को ऐसी पेशकश करने का खंडन किया। लेकिन तेंदुलकर के साथियों वीवीएस लक्ष्मण, जहीर खान और हरभजन सिंह ने उनके दावों का समर्थन किया है।

तेंदुलकर से पूछा गया कि उन्होंने द्रविड़ के सामने इसका खुलासा क्यों नहीं किया। तो सचिन ने कहा, मैं इस बारे में द्रविड़ नहीं बताना चाहता था। जहां तक मेरा सवाल है तो मैंने इसे स्वीकार नहीं किया था और यह मसला वहीं पर समाप्त हो गया था इसलिए मुझे लगा कि बात खत्म हो गयी है। और मैं टीम में कोई माहौल पैदा नहीं करना चाहता क्योंकि यह ग्रेग के साथ मेरी शुरुआत थी। तेंदुलकर ने कहा, मैंने तब तक ग्रेग के साथ कोई मैच नहीं खेला था। मैंने ऑपरेशन करवाया था और यह विश्व कप से कुछ महीने पहले की बात है जब वह मेरे साथ बात करने के लिये आये।

तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कोच बनने के बाद चैपल ने इस तरह का रवैया क्यों अपनाया। उन्होंने कहा, मैं नहीं जानता। काश मैं समझ सकता कि वह क्या करने की कोशिश कर रहा है। तेंदुलकर ने कहा कि जब शुरू में उनके साथियों ने उनसे ग्रेग के बारे में शिकायत की तो उन्होंने उनसे इस ऑस्ट्रेलियाई को कुछ समय देने के लिये कहा था।

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