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मिलीजुली सरकार विकास में बाधक

झारखंड का गठन केवल एक कारण से हुआ, वह था विकास। बिहार के समय राज्य का समुचित विकास नहीं हो रहा था। सत्ता का केंद्र पटना था और विकास भी उत्तरी बिहार में हो रहा था। इसलिए झारखंड को विकास के नाम पर अलग किया गया, लेकिन 14 वर्ष में समुचित विकास नहीं हो पाया। इसकी मुख्य वजह मिलीजुली सरकार है। कभी भी राजनीतिक स्थिरता नहीं रही।  छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड मुकाबले झारखंड पिछड़ गया। यहां तक कि अगर 2000 से 2014 के बीच बिहार और झारखंड में संसाधनों के विकास की तुलना की जाए, तो यह राज्य पिछड़ा हुआ दिखेगा।

सत्ता के लिए समझौता : झारखंड गठन के 2-3 वर्ष के कार्यकाल को छोड़ दें तो विकास का सही मायने में प्रयास ही नहीं किया गया। सत्ता के लिए हमेशा समझौता होता रहा। भ्रष्टाचार चरम पर है। जो अच्छे नेता थे, वह बगल होते गए। जो काम करना चाहते थे, उन्हें भी साथ नहीं मिला। सभी सत्ता बचाने के लिए एक-दूसरे के गलत-सही को जायज बनाने में लगे रहे। 

जवाबदेही नहीं है तय : राज्य में मंत्री हों या अधिकारी किसी की जवाबदेही तय नहीं है। हर वर्ष केंद्रीय फंड का करोड़ो रुपये लैप्स कर जाता है। मंत्रियों से यह नहीं पूछा जाता कि राशि क्यों लैप्स कर रही है। मंत्री और विधायक अफसरशाही को दोषी ठहराते हैं। हकीकत यह है कि अफसर मुख्यमंत्री व मंत्री के अधीन हैं। अधिकारियों का सीआर वही लिखते हैं। आज तक किसी भी सीआर में यह नहीं लिखा गया कि योजनाओं की राशि को खर्च करने में कोताही बरती है।

अधिकारी बदल दिए जाते : अधिकारियों का तबादला राज्य में खेल बात है। यहां न ही सिविल सर्विस बोर्ड का गठन हुआ और न ही सेक्योरिटी ऑफ टेन्योर बना। अधिकारी को जब मर्जी तब बदल दिया जाता है। 2000 से 2011 के बीच मैं खुद 19 विभागों में घूमा।
प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त : राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को ध्वस्त कर रख दिया गया है। जिन उद्देश्यों से बोर्ड, निगम व अन्य संस्थानों का गठन हुआ वह पूरा नहीं हुआ। जेपीएससी ने गत 14 वर्ष में चार परीक्षाएं ली, तो कर्मचारी चयन आयोग ने एक परीक्षा ली। उपर से लेकर नीचे तक की व्यवस्था ध्वस्त है। विश्वविद्यालय, स्कूल से लेकर सरकार के किसी विभाग में सही-सही नियुक्ति नहीं हो पाई।
गुणवत्ता पर नजर नहीं : सबसे अहम बात है कि जो काम हुआ, उसकी गुणवत्ता पर किसी की नजर नहीं है। कोई इसके लिए जवाबदेह भी नहीं है। हज हाउस बना, क्या स्थिति से सभी देख रहे। सड़कों का निर्माण होता है और टूट जाते हैं। कुछ पंचायत भवन बने तो खंडहर बने हुए हैं। चेक डैम की स्थिति खराब है। इस तरह के छोटे-छोटे कुछ काम हुए तो उनमें गड़बड़ी के प्रति कोई जवाबदेह नहीं है। 
परिवर्तन की जरूरत : राज्य में परिवर्तन तभी संभव है जब स्थिर और बहुमत वाली सरकार हो। सरकार में काम करने की मंशा हो। मुख्यमंत्री में फैसले लेने की शक्ति हो। कुर्सी पर बने रहने की लालसा नहीं हो और बगैर किसी दबाव का निर्णय ले। विकास और जनता के प्रति जवाबदेही हो। व्यक्तिगत स्वार्थ से बाहर निकल कर राज्य हित में काम करने का जुनून हो।
(जैसा संवाददाता को बताया)

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