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युवाओं को चाहिए मौके, महिलाओं को सुरक्षा

चुनावी रंग में शहर भी रंगने लगा है। राजनीतिक पार्टियां जहां गठबंधनों और समीकरणों में उलझी हैं, वहीं आम शहरी अपने मुद्दों के साथ तैयार बैठे हैं। महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं, तो युवाओं को अवसर और बेहतर माहौल की जरूरत है। बुजुर्ग तीर्थ स्थानों की सुगम यात्रा के लिए बेहतर रेल सेवा चाहते हैं। वहीं आम शहरी एक बेहतर शासन व्यवस्था। बुधवार को निगम पार्क में हिन्दुस्तान की मिनी चौपाल जमी। एक बार सियासी बहस शुरू हुई, तो मुद्दे निकलते ही चले गए। यह सहमति भी बनी कि बेहतर राजनीतिक माहौल और अच्छी शासन व्यवस्था के लिए वोट की चोट जरूरी है।

महिलाओं के लिए सुरक्षा सबसे अहम
मिनी चौपाल में महिलाओं के बीच सुरक्षा बड़ा मुद्दा रही। जबकि, सफाई, महंगाई, टूटी सड़कें अन्य अहम मुद्दे थे। अपर बाजार इलाके की समस्या बताते हुए रेखा चितलांगिया ने कहा कि विधि-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब है कि महिलाओं ने मॉर्निंग वॉक पर निकलना छोड़ दिया। पहली बार वोट करने को लेकर उत्साहित छात्रा शिखा शर्मा का कहना था कि कैंपस के बाहर हमेशा लड़कों का जमावड़ा रहता है। पुलिस देखती रहती है, लेकिन उन्हें भगाती नहीं। भारती ने अपनी परेशानी बताई, कहा कि सड़क पर इतनी गंदगी पसरी रहती है कि पैदल चलना मुश्किल होता है। सुमन ने कहा कि शाम में सड़क पर चलते हुए हमेशा डर लगा रहता है। महिलाओं ने माना कि सारी समस्याओं का समाधान एक अच्छी और स्थायी सरकार ही है।

मतदान को लेकर युवा उत्साहित
युवा वर्ग मतदान को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आया। मिनी चौपाल में आए ज्यादातर युवा ऐसे थे, जो पहली बार विधानसभा चुनाव में मतदान करेंगे। छात्र सुमन मिश्रा ने मुद्दा छेड़ा कि सरकार युवा प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए गंभीर नहीं है। आशुतोष द्विवेदी का कहना था कि बालश्रम राज्य के लिए कलंक है। संजय साबू और प्रभात सिंह की शिकायत थी कि राज्य में अच्छे शिक्षण संस्थान हैं, बावजूद इसके नेताओं की अदूरदर्शिता के कारण यह एजुकेशन हब के रूप में नहीं उभर पाया। छात्र नीतेश कुमार पांडेय ने कॉलेजों व स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। युवाओं का कहना था कि वे ऐसी सरकार के लिए मतदान करेंगे जो अपराधमुक्त और अवसरों से भरपूर वातावरण तैयार करे। शिक्षित और जमीन से जुड़े नेताओं को ही मौका देंगे।

बुजुर्गों की समस्या पर ध्यान नहीं
चौपाल में बुजुर्गों ने भी अपने मुद्दे उठाए। 75 वर्षीय अशोक नागपाल की शिकायत थी कि किसी भी सरकार ने तीर्थ स्थलों की यात्रा को सुगम बनाने पर विचार नहीं किया। कम-से-कम हरिद्वार और बोधगया जैसे तीर्थ स्थानों के लिए तो सीधी रेल सेवा देते। यह मुद्दा भी उठा कि बुजुर्ग नागरिकों की समस्याएं राजनीतिक पार्टियां नहीं उठातीं। बुजुर्ग इस बार वे ऐसे प्रत्याशियों को मौका देंगे जो विधि-व्यवस्था, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के साथ आम लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करा सकें।

आम शहरियों ने कहा- वोट की चोट जरूरी
बहस-मुबाहिसों का दौर चला तो पानी, बिजली, सड़क, सफाई, विधि-व्यवस्था, महंगाई जैसे मुद्दे निकलते चले गए। अशोक पुरोहित ने अपर बाजार इलाके की समस्या उठायी। कहा कि हमारे यहां सड़क तो बनी, लेकिन अब दूसरी समस्या खड़ी हो गई। नाली का पानी सड़क पर आ जाता है। पर्याप्त स्ट्रीट लाइट न होने से महिलाएं शाम में निकलते से डरती हैं। शुभम और अमन ने कहा कि सरकार टैक्स लेती है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं भी नहीं देती। राजीव रंजन ने खराब विधि-व्यवस्था को कोसा, तो राकेश कुमार ने पीने के पानी का मुद्दा उठाया। आलोक, आनंद, गोविंद, राकेश कुमार और अशोक कुमार सोनी ने झारखंड के साथ बने उत्तरांचल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का हवाला देते हुए झारखंड के पिछड़ेपन का जिक्र किया।

हर वोट जरूरी
रेखा- हमारा शहर राजधानी होने के बावजूद प्लांड नहीं है। शहर बढ़ता जा रहा है, लेकिन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। एक स्थायी सरकार ही, बदलाव ला सकती है।
उषा- हम टैक्स देते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं। स्कूल बसें रोज जाम में फंसती हैं। न फ्लाई ओवर बना और न सड़क चौड़ी हुई। नई सरकार इन समस्याओं से निजात दिलाए।
सुमन- मॉर्निंग वॉक पर निकलने में डर लगता है। कितनी महिलाओं ने तो निकलना ही छोड़ दिया, क्योंकि जब-तब चेन-स्नैचिंग की घटना घटती रहती है। महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं।
विनीता- लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान अनिवार्य है। हम जागरूक होंगे तभी सरकार में अच्छे लोग चुनकर आएंगे। ऐसी सरकार के लिए वोट करेंगे जो मूलभूत सुविधाएं व सुरक्षा तो दे।
अनीता- क्षेत्र की समस्याओं की जिसको समझ होगी उसी को वोट देंगे। पिछली सरकारों ने महिला सुरक्षा पर सिर्फ बातें ही कीं, काम कुछ नहीं किया। पीने का साफ पानी तक नहीं मिलता।
अशोक पुरोहित- एक स्थायी सरकार ही राज्य की स्थिति सुधार सकती है। निजी स्कूलों और डॉक्टरों की मनमानी पर सरकारें अब तक कोई नियंत्रण नहीं कर पाईं। नई सरकार इससे निजात दिलाए।
सुमित मिश्रा- जो भी सरकार बने वह गरीबों और बच्चों की हितैषी हो। गरीब छात्र प्रतिभाशाली होने के बावजूद आइआइएम या एनएलयू जैसे संस्थानों में नहीं पढ़ सकते। इसका हल निकले।
आशुतोष द्विवेदी- जो पार्टी युवाओं को बेहतर अवसर देने की बात करेगी उसे ही वोट देंगे। कितने शर्म की बात है कि हमारे राज्य की बेटियां महानगरों में घरेलू कामगार के तौर पर काम करती हैं।
राजीव रंजन- आम आदमी को पीने का साफ पानी भी नहीं मिलता। जब राजधानी में घंटों बिजली गुल रहती है तो गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालात बदलने होंगे।
अमन- समस्याएं तो हजार हैं, लेकिन नई सरकार से उम्मीद होगी कि वह मूलभूत सुविधाएं ही मुहैया करा दे। ऐसे प्रतिनिधि को चुनकर लाएंगे, जिसके पास विजन हो। वादों से काम नहीं चलेगा।

 

 

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