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वोटर न सही, बच्चे भी जारी करेंगे अपना चुनावी घोषणापत्र

राज्य में विधानसभा के चुनावी माहौल, राजनीतिक पार्टियों व प्रत्याशियों पर बच्चों की भी नजर है। बच्चे वोटर न सही, लेकिन सुरक्षित, स्वस्थ और खुशहाल बचपन के हकदार हैं। अपना यह हक मांगेंगे वे तमाम राजनीतिक पार्टियों और उनके प्रत्याशियों से। इतना ही नहीं, वे अपना घोषणापत्र भी जारी करेंगे। साथ ही, उनका ‘बाल अधिकार कारवां’ हर जिले में अभिभावकों को जागरूक करेगा। राज्य में यह पहला मौका है, जब बच्चे प्रत्याशियों को अपनी पसंद-नापसंद की कसौटी पर कसेंगे। बालमित्र ग्राम के बच्चों के इस अनोखे अभियान को बचपन बचाओ आंदोलन, एटसेक व भारतीय किसान संघ का सहयोग मिल रहा है। अभियान 13 नवंबर से राज्य भर में चलेगा।

चुनें उन्हें, जो बचपन बचाए
इस अभियान में बालमित्र ग्राम व बाल संसद के बच्चे शामिल हैं। अभियान के तहत बच्चे अपना घोषणा पत्र जारी करेंगे। घोषणापत्र में राज्य को बालश्रम मुक्त करने, बच्चों पर लैंगिक हमले, शिक्षा, कुपोषण से मुक्त करने की मांग शामिल है। साथ ही, बाल अधिकारों की चर्चा की गई है, जिसमें स्कूलों में नामांकन से लेकर स्वास्थ्य सुविधा, खेल, सुरक्षा जैसे मुद्दों की चर्चा की गई है। अभियान बाल अधिकार कारवां के रूप में सभी जिलों से गुजरेगा। इसमें बच्चे नुक्कड़ नाटकों के जरिए अभिभावकों को जागरूक भी करेंगे कि वे ऐसी सरकार चुनें, जो बच्चों की हितैषी हो। इसके लिए नारे भी तैयार कर लिये गए हैं। चुनें वही जो बचपन बचाए, जो बच्चों की बात करेगा झारखंड में राज करेगा, जैसे नारे गली-गली गूंजेंगे।

सांकेतिक मतदान करेंगे
घोषणापत्र पर बच्चे सभी जिलों में प्रत्याशियों से हस्ताक्षर कराएंगे। इसके तहत प्रत्याशियों से सवाल किया जाएगा कि क्या वे बचपन समर्थक हैं? या वे बचपन विरोधी हैं। प्रत्याशियों के जो जवाब होंगे, उसके आधार पर बच्चे उनके पक्ष या विपक्ष में मतदान करेंगे। यह सांकेतिक मतदान यह तय करेगा कि कौन-सा प्रत्याशी बचपन विरोधी है और कौन बचपन समर्थक। इसकी घोषणा बाल संसद में की जाएगी।

13 को एक शाम बचपन के नाम
बाल दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी में 13 नवंबर को ‘एक शाम, बचपन के नाम: बाल धमाल’ का आयोजन किया गया है। बचपन बचाओ आंदोलन, एटसेक व भारतीय किसान संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से जुटे बच्चे अपने अधिकारों की बात रखेंगे।

56 लाख बच्चे हैं राज्य में 14 वर्ष तक के
5 लाख बच्चे ऐसे जो शिक्षा से वंचित हैं, ये बच्चे बालश्रमिक के तौर पर कठिन परिस्थितियों में जीवन बसर कर रहे हैं

बच्चे वोटर नहीं हैं, लेकिन वे अभिभावकों को ऐसी सरकार चुनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जो बच्चों की हितैषी हो। बच्चों की अपील से मतदान का प्रतिशत भी बढ़ेगा।- संजय मिश्र, सदस्य राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग

 

 

 

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