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परियोजनाओं के लिए लीज पर जमीन लेगी सरकार

आधारभूत संरचना और लोक प्रयोजन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सरकार अब जमीन का अधिग्रहण नहीं कर रैयतों से जमीन लीज पर लेगी। लीज के एवज में ग्रामीण क्षेत्र के रैयतों को उनकी जमीन के एमवीआर से चार गुना अधिक राशि उन्हें मुआवजे के रूप में देगी। शहरी क्षेत्र के जमीन मालिकों को एमवीआर से दो गुना अधिक राशि दी जाएगी। जमीन पर जमीन मालिक का मालिकाना हक जरूर रहेगा पर वह लीज वाली जमीन को बेच नहीं सकेंगे। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस आशय की नीति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि केंद्रीय भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत इस बात का प्रावधान है। लीज की प्रकृति सतत (परपिचुअल) लीज की होगी। शैक्षणिक संस्थान, सड़क, बिजली परियोजनाओं, संपर्क पथ, स्टेडियम, बांध व नहर आदि के लिए जमीन लीज पर ली जा सकेगी। लीज पर ली गई जमीन से लैंड बैंक का निर्माण भी किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक आपदा से प्रभावितों के पुनर्वास व उक्त अधिनियम की धारा 2 (1) के तहत परिभाषित अन्य लोक उद्देश्यों के लिए भी जमीन लीज पर ली जा सकेगी।

 

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