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आ लौट के आजा काले धन...

मोदी जी ने अच्छा किया कि बता दिया, वह विदेशों में जमा काले धन की पाई-पाई भारत लेकर आएंगे। कुछ मित्रों को डर था कि कहीं वह दस-पांच रुपये छोड़ न आएं, इससे देश का नुकसान हो जाएगा। अब वे आश्वस्त हैं कि मोदी जी पक्के गुजराती हैं, हिसाब में गड़बड़ नहीं होने देंगे। इस मायने में उनका रिकॉर्ड बहुत अच्छा है, वह हिसाब पूरा चुकता करते हैं, चाहे तो कांग्रेसियों से पूछ लो।

देशभक्ति का तकाजा है कि विदेशों में जमा काला धन भारत में आना चाहिए। देशभक्ति का सीधा ताल्लुक विदेशों के विरोध से है, देश का काला धन देश में ही रहना चाहिए, विदेश नहीं जाना चाहिए। देश में वह काला धन क्या करेगा, यह हमारी समस्या है। हम उसे प्यार से पाले- पोसेंगे। आखिर वह देश में ही पैदा हुआ। यहीं उसे फलने-फूलने का मौका मिला। फिर जब वह कृतघ्न विदेश चला गया, तब वह देशभक्ति के दायरे में आ गया। जब तक वह देश में था, हमें कोई समस्या नहीं थी। जो काला धन देश में अब भी है, उससे कभी हमने कुछ कहा?

यह वैसा ही है कि जब दाऊद इब्राहिम विदेश चला गया, तो हमारी देशभक्ति आहत हो गई, हमने उसे भारत लाने को अपनी नाक का सवाल बना लिया। क्या-क्या नहीं किया? क्या-क्या नहीं कर रहे हैं उसे वापस लाने के लिए? वह इतने साल भारत में रहा, चैन से अपना धंधा करता रहा, तब हमें कोई दिक्कत नहीं हुई। हमने उसे तरक्की के तमाम अवसर दिए, लेकिन फिर भी वह विदेश चला गया, तो हमारा दिल टूट गया। तब वह देशभक्ति के दायरे में आ गया। काला धन हो या काला धंधा, यह सब अपने देश में ही रहना चाहिए, यह मूल सिद्धांत है हमारी देशभक्ति का।

अच्छे पैसे, अच्छे लोग, अच्छे कामों की देशभक्ति में क्या जगह है, यह हम बाद में तय करेंगे। हमारा उजला पैसा, अच्छे लोग विदेश चले जाएं, तो इस पर क्या स्टैंड लिया जाए, यह हमने अभी सोचा नहीं है। विदेश में जमा काले धन की पाई-पाई देश में आ जाए, इससे अच्छा भला और क्या होगा। हे काले पैसे, लौट आओ, हम फेयर ऐंड लवली की ट्यूब लिए तेरा इंतजार कर रहे हैं।

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