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समय की बहती धारा

इन दिनों हल्की गुनगुनी सर्दी लगने लगी है। ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के लिए सुबह में जागना किसी चुनौती से कम नहीं होता। सुबह जागने में देर क्या होती है, सब कुछ लेट हो जाता है। माना जाता है कि दिन की स्वर्णिम शुरुआत के लिए समय का बेहतर प्रबंधन जरूरी है।
रामकृष्ण परमहंस ने कहा है कि समय और समझ, दोनों एक साथ खुशकिस्मत लोगों को ही मिलते हैं, क्योंकि अक्सर समय पर समझ नहीं आती और समझ आने तक समय निकल जाता है। एक शोध के मुताबिक, अगर आप रोज एक घंटा कोई एक्स्ट्रा काम करते हैं, तो उससे आप कम से कम इतना पैसा कमा सकते हैं कि दो अखबार, दो-दो साप्ताहिक व मासिक पत्रिकाएं और एक दर्जन किताबें खरीद सकें। साथ ही, रोजाना एक घंटा किसी किताब के बीस पन्ने पढ़ सकते हैं, तो साल भर में आप कई हजार पन्ने पढ़ सकते हैं, यानी करीब 18 ग्रंथ पढ़ डालेंगे। रोजना एक घंटे का सही उपयोग साधारण इंसान को विद्वान बनाने के लिए काफी है।

समय प्रबंधन का अंदाज उल्टे पिरामिड की तरह होता है। ज्यादा जरूरी काम पहले और कम जरूरी काम बाद में। अगर, इस हिसाब से हम अपने रोज के, हफ्ते के और महीने भर के कामों की प्लानिंग करके काम करते हैं, तो न हड़बड़ाहट होती है, और न ही तनाव। तभी तो कन्फ्यूशियस ने कहा है कि चेतना का नियोजन समय के नियोजन के साथ होना चाहिए। जबकि, स्वामी विवेकानंद का कहना था कि एक समय में एक काम करो और बाकी सब भूलकर अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो।
इसी के लिए ओशो कहते हैं कि नदी की धारा हर पल नई होती है और जीवन में समय की धारा भी। तेज रफ्तार की बात करने की बजाय समय की रफ्तार में खुद को ढालने की कोशिश करें, तो जिंदगी के मायने काफी बदल सकते हैं।
शशिप्रभा तिवारी

 

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