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तकनीक बढ़ी पर कम नहीं हुई मरीजों की परेशानी

एम्स में मरीजों की सुविधाओं के लिए भले ही तकनीक का प्रयोग बढ़ा दिया हो, लेकिन मरीजों को अब भी कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऑन लाइन बुकिंग पर मरीज का केवल नाम पंजीकृत होता है, पंजीकरण नंबर के लिए उन्हें फिर से लंबी लाइनों में ही लगना पड़ता है। हालांकि मरीजों ने समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।

मैं बीते तीन साल से एम्स में इलाज के लिए आ रही हूं, पांच साल के बेटे का हार्निया का ऑपरेशन हुआ था, पुराने मरीजों के लिए भी ऑन लाइन पंजीकरण की सुविधा दी है, लेकिन अब तक इसका मुङो कोई फायदा नहीं मिला, एक बार किसी की मदद से ऑन लाइन के लिए आवेदन किया, लेकिन वहां पंजीकरण हुआ कोई नंबर नहीं दिया गया, यहां दोबारा आकर लाइन में लगाना पड़ा
रूकमनी, परिजन
एक महीने पहले ओपीडी में एलर्जी की बीमारी का इलाज कराने के लिए पहली बार एम्स आया था, ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा के बारे में सुना, लेकिन इसे अधिक व्यवहारिक बनाना चाहिए, मसलन पंजीकरण लॉगइन करने के बाद भी मरीज को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि उसने ऑनलाइन सुविधा का विकल्प लिया है
रजत, मरीज

 एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की एक ऐसी सुविधा है जहां इलाज का पैसा एक साथ जमाकर उसे एटीएस से स्वैप कराया जा सकता है, ऐसा इसलिए किया गया कि मरीज को बार-बार कैश काउंटर पर न जाना पड़े, अगस्त महीने मे मैंने ऑपरेशन कराया, जमा धनराशि से वापस कुछ भी नहीं मिला। चिकित्सकों ने उनकी ही अधिक महंगी दवाएं लिख दी    
बिजेन्द्रर, मरीज

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