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कप्तानी से व्यक्ति के रूप में मुझ पर असर पड़ा: तेंदुलकर

कप्तानी से व्यक्ति के रूप में मुझ पर असर पड़ा: तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर ने भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी इसलिए छोड़ी क्योंकि टीम की अगुआई करने का दबाव व्यक्ति के रूप में उन्हें प्रभावित कर रहा था और वह अपने परिवार के साथ मौजूद रहने के दौरान इससे अलग नहीं हो पार रहे थे।

तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा प्लेइंग इट माइ वे के लांच के मौके पर पत्रकारों से कहा कि इसका (कप्तानी का) व्यक्ति के रूप में मुझे पर असर पड़ने लगा था। और जिस भी हार का मैंने सामना किया वह मुझे पीड़ा पहुंचा रही थी। मैदान के बाहर भी जब मैं अपने परिवार के साथ था तो मैं इससे नहीं उबर पा रहा था क्योंकि मैं लगातार इसके बारे में सोचता था।

उन्होंने कहा कि इससे मैं परेशान होने लगा था और निजी तौर पर इसका मुझ पर असर पड़ रहा था। इसलिए मुझे लगा कि अगर एक खिलाड़ी के रूप में मैं योगदान दे पाऊं और अगले कप्तान को सुझाव दूं। बल्लेबाज के रूप में शानदार सफलता के बावजूद कप्तान के रूप में विफलता के बारे में पूछने पर तेंदुलकर ने कहा कि लोगों को इसके लिए तब के स्कोरबोर्ड देखने होंगे।

उन्होंने कहा कि मैंने कभी उन खिलाड़ियों की आलोचना करने पर विश्वास नहीं किया जिनके साथ मैं खेला। यह गलत है। अगर आप तब के स्कोरबोर्ड देखो को यह काफी स्पष्टीकरण दे देंगे।
 तेंदुलकर ने कहा कि जब हम भारत में खेले तो हमने दक्षिण अफ्रीका को हराया, हमने ऑस्ट्रेलिया को हराया, इसलिए हमें सफलता मिली लेकिन मुझे लगता है कि दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज और कुछ अन्य मौकों पर ऐसे मैच थे जिनके बारे में मुझे लगता है कि हमें जीतना चाहिए था। यह बड़ी निराशा है कि हम इन्हें अपने पक्ष में नहीं कर पाए।
 

 

 

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