DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आबादी भी समस्या है

देशवासियों को याद होगा कि जिस दिन देश की आबादी सौ करोड़ हुई थी, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घोषणा की थी कि ‘आज हम सौ करोड़ हो गए।’ पिछले दस-बारह वर्षों में आबादी भयंकर रूप से बढ़ी है और अब हम सवा सौ करोड़ हो गए हैं। यही रफ्तार रही, तो अगले कुछ वर्षों में हम डेढ़ सौ करोड़ हो जाएंगे। प्रधानमंत्री बड़े गर्व से आबादी के सवा सौ करोड़ होने और भारत के विश्व का सबसे युवा देश होने की बात कहते हैं। आखिर शासन के स्तर पर यह क्यों नहीं सोचा जाता कि आबादी के सवा सौ करोड़ या डेढ़ सौ करोड़ होने से काफी नुकसान है? दुनिया में कुछ लाख की आबादी वाले छोटे देश बड़ी सुख, शांति और समृद्धि से जी रहे हैं और वहां का जीवन-स्तर काफी ऊंचा है। क्या कभी यह सोचा गया कि आबादी के हिसाब से हमारे संसाधन कितने बढ़ रहे हैं, कुछ लोग समृद्धि के आकाश को छू रहे हैं, तो कितने करोड़ लोग दरिद्रता के शिकार हैं?
अरुण मित्र, राम नगर, दिल्ली

ताकि सफर आरामदेह हो
मध्य प्रदेश में जैन धर्मावलंबियों का प्राचीनतम तीर्थ क्षेत्र सोनागिरी जी है, जहां पर हर साल लाखों तीर्थयात्री पहुंचते हैं। जयपुर और उसके आसपास के पचास कस्बों व गांवों से भी हजारों भक्त यहां पर वंदना करने के लिए उदयपुर-खजुराहो एक्सप्रेस द्वारा दतिया स्टेशन पहुंचते हैं और वहां से काफी मुसीबत झेलकर टैंपू से वापस सोनागिरी जी पहुंचते हैं। सोनागिरी में भी रेलवे स्टेशन है और पचास साल पहले से है। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस जैसी बड़ी रेलगाड़ियों का यहां ठहराव भी है। उसके बावजूद रेल अधिकारी उदयपुर एक्सप्रेस का ठहराव सोनागिरी जी स्टेशन पर नहीं कराते, जो उचित नहीं है। मैं रेल मंत्री और क्षेत्र के मौजूदा सांसद से यह निवेदन करना चाहूंगा कि वे अपने अधिकारों का नैतिकतापूर्वक सदुपयोग करके उदयपुर-खजुराहो एक्सप्रेस का ठहराव सोनागिरी जी स्टेशन पर कराकर तीर्थयात्रियों को राहत पहुंचाने का काम करें।
नेमीचंद छाबड़ा, टोंक रोड, जयपुर

देर से दफ्तर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के मंत्री अचानक अपने दफ्तर का दौरा कर देर से पहुंचने वाले अधिकारियों को फटकार लगाते हैं। परंतु देश भर में स्थित सरकारी दफ्तरों का बुरा हाल है। कर्मचारी देर से दफ्तर आते हैं और दफ्तर का काम करने से परहेज करते हैं। अक्सर व्यापार कर और आयकर दफ्तर जाने का मौका मिलता है, जहां छोटे-मोटे काम में भी पूरा दिन बरबाद हो जाता है। कारण वही है कि सरकारी बाबू ग्यारह बजे के बाद आते हैं। पहले चाय पीते हैं, फिर उनकी मीटिंग होती है। पौने एक बजे लंच की तैयारी होने लगती है और लंच दो से ढाई बजे तक चलता है। ऐसे में, आम आदमी या तो तंग आकर वापस आ जाता है या फिर दूसरा रास्ता अपनाता है। प्रधानमंत्री और उनके मंत्री इस सरकारी सुस्ती पर ध्यान दें, तो कामकाज जल्द निपटेंगे, अफसरों के सामने फाइलों की ढेर नहीं लगेगी और काम होने से आम आदमी का सरकार पर भरोसा बढ़ेगा।
पवन कुमार झा, शालीमार बाग, नई दिल्ली-88

उद्योग बढ़ाने के लिए
पहले यूपीए और अब एनडीए की सरकार विदेशी निवेश के लिए लालायित है। कवायद इस स्तर तक है कि नियम-कानून बनाकर निवेश को सिंगल विंडो से मंजूरी दिलाने की बात हो रही है और रेड टेप नहीं, रेड कारपेट पर ज्यादा जोर है। इन सबमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन ये सुविधाएं अपने देश के उद्योगों को भी दी जानी चाहिए। भारतीय उद्योगपति विदेश में पैसे लगा रहे हैं। वे अपना साम्राज्य बाहर बढ़ा रहे हैं, अगर भारत में उनको भी सुविधाएं मिलें और रुकावटें कम की जाएं, तो उद्योग-धंधे और फलेंगे-फूलेंगे। आखिर व्यापारियों को करना तो व्यापार ही है। इसलिए सरकार भारतीय उद्योग जगत की जरूरतों और सुविधाओं का ख्याल भी करे।
हरिओम मित्तल, सेक्टर-15, गुड़गांव

 

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:आबादी भी समस्या है