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फचर्ाी नाम वाली गाड़ियों पर घूम रहे माननीय

र्ाी नम्बर और नाम-पते वाली गाड़ियों पर सिर्फ अपराधी ही नहीं वरन जनता की सेवा करने की शपथ लेने वाले राजनेता भी घूमते हैं। इसका दीदार राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर सरपट दौड़तीं लालबती लगी गाड़ियों को देखकर किया जा सकता है। राजधानी में महंगी लगरी गाड़ियों की अचानक आई बाढ़ को परिवर्तन का द्योतक माना जा रहा है पर इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। कुछ माह पूर्व कंकड़बाग थाने द्वारा जब्त की गई लोजपा विधायक रामा सिंह की महंगी ‘सफारी डेकोर’ इसका एक उदाहरण है।ड्ढr ड्ढr एक अंबेसडर चालक को पीटने के आरोप के बाद इस गाड़ी को विधायक सहित पकड़ा गया था। विधायक ने अपनी जमानत करा ली पर गाड़ी नहीं छूटी। छूटती तब, जब गाड़ी के असली कागजात होते। पूर राज्य में ऐसी करीब डेढ़ सौ गाड़ियां चल रही हैं। और, इन्हें दौड़ाने वालों में मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि तक शामिल हैं। छानबीन में ‘हिन्दुस्तान’ को पता लगा कि मुंबई और कोलकाता की कुछ निजी फायनांस कंपनियां पटना में बकायदा दफ्तर खोलकर इस फर्ाी धंधे का संचालन कर रही हैं। ये कंपनियां पांच लाख से 50 लाख तक की गाड़ियां सिर्फ आधा पैसा कैश देने पर उपलब्ध करा देती हैं। शर्त होती है कि ग्राहक आधे पैसे में पांच वर्ष तक गाड़ी का इस्तमाल कर। फिर उसकी इच्छा हो तो फुल पेमेंट देकर गाड़ी अपने नाम करा ले। ग्राहक को डिलवरी देते समय गाड़ी पर बाहर का रािस्ट्रेशन नंबर चढ़ा होता है। लोजपा विधायक रामा सिंह स्वीकार करते हैं कि उन्होंने कई गाड़ियां लीं पर ओरिानल पेपर न होने के कारण जब्त गाड़ी को छुड़ाने में उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस फर्ाीवाड़े से राज्य परिवहन विभाग को रोड टैक्स के रूप में प्रतिवर्ष लाखों की चपत लग रही है। पटना के डीटीओ नीलकमल कहते हैं कि अन्य राज्यों के रािस्ट्रेशन वाली गाड़ियों को सीमित समय के लिए ही यहां की सड़कों पर चलने का प्रावधान है।

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