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बृहस्पति की आंख भी है!

बृहस्पति की आंख भी है!

नासा के वैज्ञानिकों ने 21 अप्रैल 2014 को एक काले रंग का डॉट खोजा, जब वे ग्रेट रेड स्पॉट्स पर अध्ययन कर रहे थे। काले रंग का यह डॉट बिना आइब्रो की आंख की तरह दिखाई देता है। इसके बारे में बता रही हैं रजनी अरोड़ा

हाल ही में नासा के वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के सबसे बड़े और सौरमंडल के पांचवें ग्रह बृहस्पति (जूपिटर) की सतह के बीच मौजूद ग्रेट रेड स्पॉट्स में आंख जैसी आकृति होने की पुष्टि की है। यह हमारी आंख से थोड़ा अलग है। इसमें आईबॉल तो काले रंग की है, लेकिन बाकी आंख सफेद न होकर लाल रंग की है। बृहस्पति की इस आंख की शानदार फोटो वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के वाइड फील्ड कैमरा-3 के जरिये ली है।

इसे उन्होंने बृहस्पति के 10,000 मील डायमीटर(व्यास) के दायरे से लिया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अगर यह कहा जाए कि हेलोवीन डे के मौके पर नासा के वैज्ञानिकों ने दुनिया को बृहस्पति को एक आंख वाले पौराणिक ग्रीक करेक्टर ‘साइक्लोप्स’ के समान डरावने रूप में पेश किया है तो गलत नहीं होगा। नासा के वैज्ञानिकों को यह अंदेशा था कि हमारी पृथ्वी से करीब 317 गुना बड़े बृहस्पति ग्रह का ग्रेट रेड स्पॉट तेजी से सिकुड़ता जा रहा है। इसके कारणों की खोज करने के लिए वे कई सालों से जुटे थे। ग्रेट रेड स्पॉट वास्तव में हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों से भरा है और इसके बीचोबीच भूमध्य रेखा पर आने वाले साइक्लोन तूफान हैं, जो ग्रह पर रेड स्पॉट्स बनाते हैं। ये साइक्लोन आज से करीब 300 साल पहले बहुत तेजी से आते थे। तूफान की गति में तेजी से हो रही गिरावट के बावजूद आज भी ये सौरमंडल में आने वाले सबसे बड़े साइक्लोन हैं, जिनकी चपेट में हमारी पृथ्वी जैसे दो से तीन ग्रह आसानी से आ सकते हैं। सबसे पहले 1665 में जियान डोमेनिको कैसिनी ने दूरबीन की सहायता से इन तूफानों और उनसे बनने वाले ग्रेट रेड स्पॉट्स का पता लगाया था।

कैसी है ये आंख
नासा के वैज्ञानिकों ने 21 अप्रैल 2014 को एक काले रंग का डॉट खोजा जब वे साइक्लोन तूफान रूपी ग्रेट रेड स्पॉट्स पर रिसर्च कर रहे थे। काले रंग का यह डॉट बिना आइब्रो की आंख की तरह दिखाई देता है। ऐसा लगता है कि यह आंख हमें घूर रही है। जबकि सच्चाई यह है कि यह कोई आंख नहीं है, केवल एक भ्रम है। वास्तव में यह काला डॉट बृहस्पति ग्रह के सबसे बड़े और सातवें चंद्रमा- गेनीमेड की शेडो (परछाई) है। गेनीमेड बृहस्पति के 4 बड़े (गेनीमेड, कब, यूरोपा, कैलिस्टो) और दूसरे 63 चंद्रमा में ही नहीं, पूरे सौरमंडल में सबसे बड़ा चंद्रमा और उपग्रह है। ये चंद्रमा एक निश्चित गति और दूरी से बृहस्पति के चारों ओर चक्कर लगाते रहते हैं। 21 अप्रैल को जब यह गेनीमेड चंद्रमा ग्रह के ग्रेट रेड स्पॉट्स के बीच आया तो नासा के वैज्ञानिकों ने उसकी फोटो खींच ली, जिसे पिछले दिनों जारी किया गया। इसके बाद से पूरी दुनिया में यह चर्चा का विषय बन गया है।

वैज्ञानिकों को 7 नवंबर यानी कल के दिन बृहस्पति ग्रह के बारे में और जानकारी प्राप्त करने की आशा है। वैज्ञानिकों की ओर से यह सूचना दी गई है कि ग्रह को पश्चिम देशों में एक सितारे की तरह रात 1 बजे के बाद देखा जा सकेगा। वहीं इंडियन स्टेंडर्ड टाइम के हिसाब से 7 नवंबर को रात 2:53 बजे गेनीमेड चंद्रमा की परछाई का डॉट बृहस्पति की सतह पर दुबारा करीब दो घंटे के लिए दिखाई देगा।

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