DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शिफ्ट बदलना कर देता है बीमार

शिफ्ट बदलना कर देता है बीमार

बार-बार शिफ्ट बदलने से कर्मचारियों का दिमाग धीमे-धीमे सुन्न होने लगता है। इससे मस्तिष्क धीमे काम करता है और याद्दाश्त भी कमजोर होने लगती है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

स्वीडन और फ्रांस के शोधकर्ताओं ने तीन हजार से ज्यादा लोगों की मस्तिष्क क्षमताओं का अध्ययन किया। ये सभी लोग 1996, 2001 और 2006 में सेवानिवृत्त हो चुके थे। पहली जांच के समय इनकी उम्र 32 से 62 साल के बीच थी। ज्यादातर लोग बारी-बारी सुबह, दोपहर और रात की शिफ्ट में काम करते थे।

अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि रोज एक ही समय काम करने वालों की तुलना में शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की याद्दाश्त, मस्तिष्क के काम करने की रफ्तार और दिमाग की शक्ति तेजी से कमजोर होती है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे नौकरियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जहां 24 घंटे काम करना होता है। ऐसी स्थिति में जहां तक हो सके कर्मचारियों को एक ही शिफ्ट में रखना चाहिए। इससे उनकी कार्यक्षमता पर विपरीत असर नहीं पड़ता है।

जेट लैग जैसी बीमारी
शोधकर्ताओं के मुताबिक अलग-अलग शिफ्ट में काम करने से जैविक घड़ी गड़बड़ हो जाती है। इससे मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे दिमाग की कार्यप्रणाली कमजोर हो जाती है। शोधकर्ताओं ने शिफ्ट में काम करने की तुलना हवाई जहाज की यात्रा से होने वाले जेट लैग से की है। दोनों ही स्थिति में जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है।

10 साल शिफ्ट में काम करने से वृद्ध होता दिमाग
शोध में यह भी पाया गया कि जिन लोगों ने 10 साल या इससे ज्यादा समय तक बदलती शिफ्ट में काम किया, उनका दिमाग 6.5 साल ज्यादा बुढ़ा हो चुका था। बाद में एक ही समय पर काम करने से भी यह नकारात्मक असर खत्म नहीं होता है।

कई और रोगों का खतरा भी
पहले हुए शोधों में पाया गया है कि शिफ्ट में काम करने से अल्सर, दिल की बीमारियों, कैंसर और मेटाबोलिज्म संबंधी रोग की आशंका भी बढ़ती है।

इन क्षमताओं की हुई जांच
दीर्घकालीन याद्दाश्त, अल्पकालीन याद्दाश्त, दिमाग के काम करने की रफ्तार और संज्ञानात्मक क्षमताओं की जांच की गई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:शिफ्ट बदलना कर देता है बीमार