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बिहार में फूलों से सजी गाड़ी पर निकली बंदर की बारात

बिहार के बेतिया के लोग एक अनोखी शादी के बाराती बने। शादी अनोखी इस मायने में थी कि इसमें दूल्हा एक बंदर था और दुल्हन थी बंदरिया।

फूलों से सजी मारुति जिप्सी पर निकली बारात में बड़ी संख्या में बाराती भी थे। बंदर-बंदरिया शहर के उदेश महतों के थे। उदेश पेशे से कुली हैं। करीब सात साल पहले नेपाल यात्रा के दौरान यह बंदर उन्हें मिला था।

इसका नाम उन्होंने रामू रखा और इसका पालन-पोषण बच्चे की तरह किया। रामदुलारी बंदरिया को वह एक साल पहले खरीद कर लाए। इस अनोखी शादी के लिए बकायदा कार्ड छपवाए गए और प्रीति भोज भी आयोजित हुआ। उदेश बताते हैं कि शुरुआत में बंदर-बंदरिया की नहीं बनती थी। लेकिन बाद में उनकी दोस्ती हो गई। उदेश बताते हैं कि उनके चार बेटे हैं, लेकिन वे बंदर रामू को ही अपना सबसे बड़ा बेटा मानते हैं।

इसलिए रामू की शादी ही वे सबसे पहले करना चाहते थे। शादी कराने वाले पंडित सुनील शास्त्री के लिए जानवरों की शादी कराने का यह पहला अनुभव था।

शुभ मुहूर्त में हुई शादी
विवाह का शुभ लग्न सोमवार सुबह 11 बजे का था। गुलाबी रंग की फ्रॉक पहने रामदुलारी और पीले रंग की टी-शर्ट पहने रामू की शादी हुई। कन्यादान उदेश की पत्नी मीना देवी को करना था लेकिन कुछ दिनों पहले रामदुलारी के काटने के कारण उन्होंने इनकार कर दिया था।

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