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24 घंटे के भीतर हो पेशी : हाईकोर्ट

सड़क जाम के बहाने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किए जाने पर गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। पटना हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 57 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 (2) का पालन हर हाल में होना चाहिए।ड्ढr ड्ढr महेश कुमार नामक एक व्यक्ित को पुलिस ने गत 1रवरी को दोपहर डेढ़ बजे गिरफ्तार किया था। कानून के तहत पुलिस को किसी नजदीक के मजिस्ट्रेट के समक्ष 20 फरवरी को उसे पेश करना था। लेकिन पुलिस ने बुरी तरह से सड़क जाम में फंसने की बात कह गिरफ्तार व्यक्ित को 21 फरवरी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया।ड्ढr इसके बाद मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तार व्यक्ित को जेल भेजने का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट द्वारा जारी रिमांड आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया कि कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार व्यक्ित को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना है। उसके बाद पेश करना गैर कानूनी है। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सड़क जाम के कारण गिरफ्तार व्यक्ित को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया जा सका। उनका कहना था कि पुलिस जानबूझ कर कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है। न्यायमूर्ति बारिन घोष तथा न्यायमूर्ति चन्द्र मोहन प्रसाद की खंडपीठ का कहना था कि 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तार व्यक्ित को पेश नहीं करना किसी भी नागरिक का मूलभूत मौलिक अधिकार का हनन है। अदालत ने कहा कि 24 घंटे का मतलब गिरफ्तारी से लेकर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना है। यात्रा में लगा समय भी 24 घंटे के भीतर आता है। अदालत ने गिरफ्तार महेश कुमार को अविलंब मुक्त करने का आदेश दिया।

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