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सैकड़ों बेटियों की शिक्षा में शिक्षकों ने लगाया रोड़ा

पिछले साल दी गई छात्रवृत्ति की राशि का हिसाब नहीं देने के कारण हाईस्कूलों में पढ़ रही जिले की 10 हजार से ज्यादा छात्राओं की छात्रवृत्ति पर ग्रहण लग गया है। प्रधानाध्यापक की इस लापरवाही का खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ सकता है। पिछले साल हाईस्कूलों को दी गई छह करोड़ की राशि का अब तक हिसाब नहीं मिलने पर प्रधान सचिव ने सख्ती की है।

इस संबंध में संबंधित हेडमास्टर के साथ अधिकारी भी तलब किये गये हैं। 200 हाईस्कूलों से नहीं मिला हिसाब वर्ष 2013-14 में जिले के 216 हाईस्कूलों को छात्रवृत्ति मद में राशि दी गई। इसके तहत छात्राओं के लिए इन स्कूलों को छह करोड़ रुपए दिये गये। एक साल बीत जाने के बाद भी जिले के 200 स्कूलों से विभाग को खर्च का हिसाब नहीं मिला है। डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान जियाउल होदा ने बताया कि मात्र 16 स्कूलों से ही हिसाब मिला है।

हिसाब नहीं मिलने से अन्य 200 स्कूलों को इस साल दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि पर तत्काल रोक लगा दी गयी है। छात्राओं का भविष्य देख इन स्कूलों को पांच दिन का समय दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि अगर इस निर्धारित अवधि में भी इन स्कूलों ने हिसाब नहीं दिया तो बच्चियों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पायेगी। इसकी सारी जवाबदेही हेडमास्टर की होगी। डीपीओ ने बताया कि इन स्कूलों में 10 हजार से ज्यादा छात्राएं हैं जिन्हें राशि मिलनी है। अगर छात्राएं राशि से वंचित रह जाती है तो संबंधित हेडमास्टर नपेंगे।

 

 

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