DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दिल्ली में विधानसभा भंग करने पर कैबिनेट की मुहर

दिल्ली में विधानसभा भंग करने की सिफारिश पर मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी: अब कैबिनेट के निर्णय को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद कभी भी दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की जा सकती है। 17 फरवरी से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। ऐसे में इसी माह जम्मू-कश्मीर और झारखंड के चुनावों संग या अगले साल जनवरी में चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। पहले से घोषित उपचुनाव को भी रद्द कर दिया जाएगा।

जंग ने राष्ट्रपति को भेजी रिपोर्ट: कैबिनेट की मंजूरी से पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजी थी। इस रिपोर्ट को राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय के पास भेज दिया। इसके बाद दोपहर को प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट बैठक बुलाई गई।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह के विदेश यात्रा पर होने के कारण गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव रखा जिसे कैबिनेट ने मंजूर कर लिया। इसी के साथ आठ माह से जारी राजनीतिक अनिश्चितता पूरी तरह खत्म हो गई और नए चुनाव का रास्ता साफ हो गया।

सियासी दांव-पेच तेज: विधानसभा चुनाव सामने देख दिल्ली में सियासी दांव-पेच भी तेज हो गए। आम आदमी पार्टी ने भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार न घोषित करने को लेकर सियासी पैंतरा खेल दिया। ‘आप’ ने इस चुनाव को केजरीवाल बना जगदीश मुखी करार दिया। ऐसा कर ‘आप’ ने खुद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम उछाल दिया।
अपने-अपने चेहरे : उधर, भाजपा ने कहा कि उनकी पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। दिल्ली में भाजपा का चेहरा कमल होगा। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि वह नए जोश के साथ मैदान में उतरेगी।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत के साथ भाजपा सबसे बड़ी
पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से वह चार सीट पीछे रह गई थी। ‘आप’ ने पहले ही चुनाव में 28 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया था।

कांग्रेस दिल्ली विधानसभा के चुनाव मजबूती के साथ लड़ेगी। पिछले पांच माह में दिल्ली वालों से समझ लिया है कौन विकास दे सकता है। इसके अतिरिक्त भाजपा ने जो भी सपने दिखाए थे। उनका हाल भी जनता ने देख लिया है।
- शकील अहमद, पार्टी प्रभारी, कांग्रेस
न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार दिल्ली विधानसभा को भंग करने का निर्णय लेने के लिए विवश हुई है। पिछले चार माह में ‘आप’ के विधायकों को खरीदने की भाजपा की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं। भाजपा ने दिल्ली में दंगा कराने की भी कोशिश की।
- अरविंद केजरीवाल

अब क्या होगी दलों की रणनीति
भाजपा : भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का मानना है कि मोदी फैक्टर पार्टी को दिल्ली में बड़ी जीत दिला सकता है।
‘आप’: पार्टी बिजली-पानी के दाम कम करने का मुद्दा भुना रही। भाजपा के सीएम के लिए जगदीश मुखी का नाम छेड़कर मोदी फैक्टर कमजोर करने की मंशा।
कांग्रेस : सीएम पद के लिए अब तक कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस नए चेहरों पर दांव लगाने पर गंभारता से विचार कर रही है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दिल्ली में विधानसभा भंग करने पर कैबिनेट की मुहर