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बेहतर संसाधन और अवसरों की तलाश में युवा

राज्य के लगभग 40 प्रतिशत युवा मतदाताओं पर तमाम राजनीतिक पार्टियों की भी नजर है। पार्टियों के घोषणापत्र से लेकर नेताओं के चुनाव प्रचार अभियान तक में युवाओं के मुद्दे केंद्र में रहनेवाले हैं। शिक्षा, रोजगार, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और कार्यसंतुष्टि। ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर अमूमन युवा राजनीतिक पार्टियों या जनप्रतिनिधियों को परखेंगे। उन्हें अपने राज्य में साइबर पार्क भी चाहिए और आईटी हब भी। उन्हें नियुक्तियों में घोटाले नहीं, योग्यता के अनुरूप अवसर चाहिए। छात्राओं को कैंपसों में सुरक्षित माहौल चाहिए। उनका सीधा-सा सवाल है कि आइआइएम, एक्सएलआरआई से निकले विद्यार्थियों के लिए राज्य में कौन-से अवसर हैं। एक होटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करनेवाले छात्र के लिए अपने ही राज्य में बेहतर अवसर क्यों नहीं हैं? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब युवाओं को अपने जनप्रतिनिधियों से चाहिए।

शिक्षा
युवाओं का कहना है मानव संसाधन का विकास जितना होना चाहिए, नहीं हो पाया। विश्वविद्यालय व कॉलेज के पास फंड नहीं हैं। एकेडमिक सेशन समय पर पूरा नहीं होता। एक सामान्य ग्रैजुएट या पोस्ट ग्रैजुएट के लिए अवसर नहीं हैं। होटल मैनेजमेंट या बायोटेक या दूसरे वोकेशनल कोर्स किए विद्यार्थियों को अपने राज्य में नौकरी नहीं मिलती। रांची के आइआइएम, एनएलयू रेंटिंग में पीछे हैं। राज्य अब तक एजुकेशन हब क्यों नहीं बन पाया।

अवसर
अवसर दूसरा बड़ा मुद्दा है युवाओं के लिए। उनका कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति हो भी जाए तो उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिलता। नियुक्ति में घोटाले की भेंट राज्य की प्रतिभाएं चढ़ती हैं। आइएमएम या उच्च तकनीकी संस्थानों से निकले विद्यार्थियों को अच्छी नौकरी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। बेहतर प्लेसमेंट एजेंसियां कैंपसों तक नहीं आतीं। स्वरोजगार के लिए राज्य में बेहतर स्थितियां तैयार नहीं हुई हैं।

संसाधन
युवाओं की नाराजगी इस बात पर भी है कि झारखंड के साथ अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड आज बेहतर स्थिति में हैं। नेताओं की अदूरदर्शिता के कारण पर्यटन की राज्य में बेहतर संभावनाएं होने के बावजूद यह उद्योग के रूप में नहीं उभर पाया। साइबर पार्क या आइटी हब के रूप में राज्य को विकसित करने की कोशिशें नहीं हुईं। राज्य में बेहतर स्पोट्र्स स्टेडियम हैं, लेकिन खेलों का विकास नहीं हो रहा। कला संस्कृति के क्षेत्र में कोई प्रयास नहीं हुए।

सड़क
युवाओं ने सड़क को भी मुद्दा बनाया। वे पूछते हैं कि जब रांची व जमशेदपुर जैसे शहरों को जोड़नेवाली सड़कों की हालत इतनी बुरी है, तो गांवों का क्या हाल होगा। परिवहन के साधन अब तक सुगम नहीं हुए। गांवों से शहर पढ़ने आनेवाले विद्यार्थियों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। रिंग रोड, फ्लाईओवर सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रह गए। शहर में टूटी सड़कें हैं और गांवों तक पहुंचना आज भी सुगम नहीं हो पाया है।
मनीष पांडेय, इंजीनियरिंग छात्र बीआइटी मेसरा- तकनीकी कॉलेजों से निकले छात्रों को नौकरी मिल जाती है, लेकिन सामान्य कोर्स के छात्र भटकते रहते हैं। कॉलेजों में क्षमता से अधिक विद्यार्थी ठूंस दिए जाते हैं। स्थायी सरकार चाहिए।

शांभवी, छात्रा बायोटेक बीआइटी मेसरा- योग्यता के अनुरूप अपने राज्य मे अवसर नहीं मिलता। राज्य में उच्च शिक्षा की अच्छी व्यवस्था है, लेकिन रोजगार नहीं है। न किसी सरकार ने इस ओर गंभीरता से काम किया।
राहुल, छात्र सीयूजे- युवाओं के साथ सरकारें धांधली करती रही हैं। शिक्षक के तौर पर उनका चयन हो भी जाए तो नियुक्तिपत्र नहीं मिलता। नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो इससे पहले घोटाले की खबर आने लगती है।
तनीशा, छात्रा सीयूजे- लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार नहीं हो पाया है। दूसरे राज्यों के मुकाबले हमारे पास बेहतर संसाधन हैं, लेकिन नेताओं के पास विजन नहीं है। गठबंधन की सरकारों ने स्थिति चौपट कर दी।
प्रितीश, छात्र एनएलयू- जो बड़े संस्थान राज्य में आए भी उन्हें भी उभरने नहीं दिया जा रहा है। जबकि, सरकारों को चाहिए था कि और भी बेहतर संस्थानाओं के लिए बेहतर माहौल तैयार करें।
रिमझिम, छात्रा एनएलयू- शिक्षा, अवसर और सुरक्षा ये ऐसे मुद्दे हैं जिस युवा एकमत हैं। राज्य की कोई युवा नीति नहीं है। उनके कौशल विकास पर भी सही तरीके से पहल नहीं की गई।

 

 

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