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अपहरण उद्योग फिर लौट रहा है वेस्ट यूपी में

वेस्ट यूपी में अपहरण उद्योग फिर लौट रहा है। एक जमाना था जब बदमाश किसी भी बड़े कारोबारी, व्यापारी, उद्यमी का अपहरण कर उसे फिरौती लेकर ही छोड़ते थे। पुलिस अफसरों ने सिरे से ऐसे गैंग के मुखिया से लेकर सदस्यों तक का सफाया कर इन पर अंकुश लगाया था। अब एक बार फिर रंगदारी के धंधे ने सिर उठा लिया है। पश्चिमी यूपी में इसकी शुरुआत राहुल खट्टा गैंग ने की है। बदमाशों के खौफ से यहां का औद्योगिक विकास भी बाधित हुआ।


लंबे समय तक मेरठ-सहारनपुर मंडल में कई गैंग अपहरण की घटनाओं को अंजाम देते रहे। पूर्व में जिन कारोबरियों और व्यापारियों का अपहरण हुआ, उनमें ईंट भप्ता व्यापारी, दवा कारोबारी, ऑटोमोबाइल्स कारोबारी, शुगर इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमी और ठेकेदार शामिल रहे। 1995 तक पश्चिमी यूपी में उद्यमियों, बड़े कारोबारियों के सबसे ज्यादा अपहरण मेरठ, बागपत, गाजियाबाद से होते थे। तब महेंद्र फौजी, राजवीर रमाला, राजवीर निबाली, राजू बली समेत कई बदमाश थे। कुछ घटनाओं में मदन भैय्या तक का नाम उछला।


इसके बाद ऐसे गैंग ने मुजफ्फरनगर में सिर उठाया। मुजफ्फरनगर और बुढ़ाना में अपहरण उद्योग ने पैर पसार लिए। इन जिलों में बदमाश अपहरण करते थे और पकड़ को ईख के खेतों में रखते थे। फिरौती मिलने के बाद नाटकीय अंदाज में उन्हें मुक्त किया जाता था। पुलिस भी फिल्मी स्टाइल में बरामदगी दर्शाकर अपनी पीठ थपथपाती थी।
एनकाउंटर से किया गिरोहों का सफाया
मेरठ में आईपीएस अफसर ब्रजलाल और वीके गुप्ता ने अपनी तैनाती के दौरान यहां अपहरणकर्ताओं के गिरोह का नेटवर्क खत्म किया। 1995 के बाद अपहरण की घटनाएं लगातार कम होती चली गईं। एनकाउंटर के डर से बदमाशों ने पश्चिमी यूपी में अपहरण उद्योग से हाथ खींच लिए। हालांकि कुछ दिनों के नए ट्रेंड में ‘पकड़’ को खरीदने-बेचने का धंधा चला। एक गिरोह अपहरण करता था और वह कई गिरोहों के हाथों बिक जाता था। मेरठ और मुजफ्फरनगर जिलों के बदमाशों में नवनीत सिकेरा का भी खौफ था। उनकी यहां एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर पहचान रही।
सरधना में पहले भी वसूली जा

चुकी है पांच करोड़ की फिरौती
80 के दशक में दिल्ली से एक दवा कारोबारी का अपहरण हुआ था, उन्हें बदमाशों ने सरधना के जंगल में रखा था। कारोबारी को पांच करोड़ की फिरौती लेकर छोड़ा गया। इसी तरह एक बड़े कारोबारी के बदले फिरौती की रकम दिल्ली पुलिस ने दबिश देकर कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र से बरामद की थी। अग्रवाल मंडी टटीरी से व्यापारी रविकांत गुप्ता और ईंट भळा व्यापारी श्रीकृष्ण गुप्ता का भी अपहरण हुआ था, जो फिरौती की रकम देकर लौटे थे। खतौली में तो फिरौती के 25 करोड़ रुपये के साथ बदमाशों को पकड़ा गया था।

बदल गया अपहरण का ट्रेंड
अब बदमाशों ने अपहरण का ट्रेंड भी बदल दिया है। पहले जब अपहरण होता था तो तुरंत ही उसकी जानकारी हो जाती थी। अब लोगों को तब पता चलता है जब निर्धारित समय तक कारोबारी घर नहीं पहुंचता या फिर फिरौती के लिए कॉल आ जाती है।

दहशत में उद्यमी
पश्चिमी यूपी में कारोबार और उद्यमी एक बार फिर दहशत में हैं। बीडीएम कंपनी के मालिक सुधीर महाजन के अपहरण की घटना एकबार फिर ताजा हो गई। बदमाशों के आतंक से बड़े कारोबारी और व्यापारी दहशत में हैं। आईआईए के मंडल अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि पुलिस अपने दायित्व का निर्वाह करे। जनता के साथ संपर्क बेहतर बनाए। जनता का पुलिस से भरोसा उठ चुका है, उसे लौटाना जरूरी है।

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