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बुर्किना फासो में शांति

अफ्रीकी यूनियन ने बिल्कुल दुरुस्त वक्त पर बुर्किना फासो में हस्तक्षेप किया। पिछले सप्ताह इस देश में उस समय राजनीतिक संकट पैदा हो गया था, जब 27 वर्षों से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति ब्लैस कॉम्पोर को गद्दी छोड़ने को विवश कर दिया गया था। कॉम्पोर की सत्ता से बेदखली उनके खिलाफ विस्फोटक जन-प्रदर्शनों की परिणति थी। दरअसल, कॉम्पोर पार्लियामेंट से अपने लिए एक और राष्ट्रपति काल की अनुमति मांग रहे थे, जिसका देश भर में पुरजोर विरोध हो रहा था। उनके इस्तीफे के बाद उनकी जगह फौजी अफसर कर्नल इसाक जिदा को नया राष्ट्रपति चुने जाने के फैसले को भी प्रदर्शनकारियों ने नकार दिया। जिदा का कहना है कि वह सत्ता हथियाने की कोशिश नहीं कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों पर यकीन करने की कोई वजह नहीं दिखती। बहरहाल, अफ्रीकी यूनियन के हस्तक्षेप से बुर्किना फासो में जम्हूरियत की बहाली की उम्मीद पैदा हुई है। अफ्रीकी यूनियन की शांति और सुरक्षा से संबंधित परिषद ने फौज को दो हफ्ते के भीतर अवाम के नुमाइंदों को सत्ता हस्तांतरित करने को कहा है।

विपक्ष की मांग है कि पार्टी फॉर डेमोक्रेसी ऐंड चेंज के मुखिया सरन सेरेम को अगला सदर बनाया जाए। देश की सभी पार्टियां एक सर्वदलीय सरकार का गठन कर सकती हैं। अगर कोई अंतरिम नेता चुना जाता है, तो फिर जल्दी से जल्दी चुनाव कराए जाने चाहिए और इसकी निगरानी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से कराई जानी चाहिए। मौजूदा संकट बुर्किना फासो में सच्चे लोकतंत्र की बहाली का एक अवसर बन सकता है। यह संसाधनों से समृद्ध देश है और जनता की बेहतरी में उनके इस्तेमाल के लिए जरूरी है कि वहां एक स्थिर व ईमानदार सरकार सत्ता में आए। यह सब-सहारा मुल्क अफ्रीका का दूसरा सबसे अधिक कपास उत्पादक देश तो है ही, पांचवां सर्वाधिक सोने की खान वाला देश भी है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की मानव विकास सूची में यह आखिरी पायदानों पर खड़े देशों में से एक है। पूर्व सैन्य अधिकारी ब्लैस कॉम्पोर 1987 में तख्ता पलट करके सत्ता पर काबिज हुए थे और इस क्रम में तब के राष्ट्र प्रमुख थॉमस संकारा की हत्या कर दी गई थी।
द पेनिनसुला, कतर

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