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कैपिटल मेंटेनेंस न होने से पीटीपीएस तबाह

पीटीपीएस के कैपिटल मेंटेनेंस नहीं होने की चर्चा की जा चुकी है। मेंटेनेंस नहीं होने के कारण थर्मल पावर स्टेशन की इकाइयां दिन पर दिन जर्जर होती चली गयीं। दस साल तक किसी यूनिट का मेंटेनेंस नहीं होना और मशीन को दोषी करार देना गलत है। कोई मशीन दोषपूर्ण नहीं होती है, बल्कि उसकी देख-रख और व्यवस्था दोषपूर्ण हो सकती है। आखिर क्या कारण थे कि साठ से लेकर नब्बे के दशक तक पीटीपीएस की इन्हीं इकाइयों से बेहतर बिजली उत्पादन लिया जाता था। क्योंकि तब सभी इकाइयों का समय पर कैपिटल मेंटेनेंस हुआ करता है। पीटीपीएस में अभी एसा कुछ नहीं हो रहा है। यदि चालू हालत में तीन इकाइयां होती हैं तो तीनों को चालू रखा जाता है। मशीन चलेंगी तो खराब होंगी। होती भी हैं। यदि एक साल में दो इकाई किसी कारणवश ठप पड़ जाती है तो बिजली उत्पादन घटकर सीधे 40 मेगावाट तक पहुंच जाता है। रिार्व में किसी इकाई को नहीं रखे जाने के कारण एसी स्थिति उत्पन्न होती है और यह सिलसिला राज्य बंटवार के बाद से लगातार जारी है। राज्य बिजली बोर्ड और पीटीपीएस प्रबंधन एक -दूसर पर दोषारोपण करने की बजाय व्यवस्था में सुधार करं तो उत्पादन में खुद-ब- खुद सुधार हो जायेगा।पीटीपीएस इकाइयों का स्थापना वर्ष और कैपिटल मेंटेनेंस की स्थिति यूनिट क्षमतास्थापनाकैपिटल मेंटेनेंसवर्तमान स्थिति 15 0 मेगा1छह बारचालू 2501नौ बारचालू 3501चार बारठप (5 साल से) 4501दो बारठप (5 साल) 5(1) 501तीन बारठप (5 साल) 5(2)501तीन बार ठप (5 साल) 6(1) 501दो बारठप (एक साल) 6(2) 501दो बारठप (एक साल) 7. 1101तीन बारचालू 8. 1101दो बारठप ( चार साल) 1101दो बारठप (20 महीना) 10. 1101तीन बारठप ( 20 महीना)

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