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कड़ी सुरक्षा में पूरी हुईं पूरे शहर में ताजिया दफन की रस्म

..या हुसैन की सदाएं लेते हुए हजारों की संख्या में अकीदमदों ने दसवीं मोहर्रम का जुलूस निकाला। सबसे बड़ा जुलूस नाजिम साहब इमामबाड़े से सुबह नौ बजे निकला जो कि कड़ी सुरक्षा में शांतिपूर्वक कर्बला तालकटोरा तक गया।

इस जुलूस में अजादारों ने सीनाजनी व खंजर से अपने सीने व पीठ पर वार कर मातम किया। स्याह लिबास, नंगे पांव रोते बिलखते अजादार इमाम हुसैन की शहादत के गम में डूबे रहे। दुधमुंहे बच्चाे को लेकर कई अभिभावक भी पहुंचे। जुलूस में शामिल होने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। घर-घर में मजलिसें हुईं। शाम को चौक के गुफरामॉब इमामबाड़े में शाम-ए-गरीबा भी हुआ।

जिसे मौलाना कल्बे जव्वाद ने खिताब किया। जुलूस की सुरक्षा पर नजर रखने के लिए स्वयं डीएम व एसएसपी मुस्तैद रहे। शहर की दूसरी कर्बलाओं में भी ताजियों के दफन होने का सिलसिला चला। इंदिरानगर में गाजीपुर गांव व फरीदीनगर, चांदन से उठने वाले ताजिए एचएएल के पास कर्बला में दफन हुए। निशातगंज व आस-पास के क्षेत्रों से उठने वाली ताजिये को पेपर मिल कालोनी कर्बला में दफन किया गया। सवरेयदनगर, लवकुश नगर, खुर्रम नगर, रहीम नगर से उठने वाली ताजियां भी पूरे अकीदत के साथ दफन की गई। आलमबाग में ताजियों का जुलूस बंगलाबाजार की कर्बला में ताजियों के दफन होने के साथ खत्म हुआ।

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