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शहर में गंदगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं झाड़ू लेकर स्वच्छ भारत का आह्वान किया। सिंधु घाटी सभ्यता को हम सामने रखते हैं, तो लगता है कि हमारा अतीत कितना सुंदर और खूबसूरत था। परंतु दिल्ली, जो कभी सौंदर्य-बोध से युक्त बादशाहों का शहर रही, अपने सुंदर अतीत को भूल गई है। इस शहर में जहां देखो, गंदगी के ढेर हैं। चाहे वह रेलवे स्टेशन हो या खाली प्लॉट। अनधिकृत बस्तियां तो इस मामले में नरक बनी हुई हैं, नगर निगम इस ओर कतई ध्यान नहीं देता। उसके सफाई कर्मचारी जहां-जहां काम करते हैं, वहां-वहां नाली के कचरे निकालकर किनारे पर रख देते हैं। वे कचरे फिर नाली में चले जाते हैं। नाले के किनारे रहने वाले लोग कचरा सीधे नाले को समर्पित कर देते हैं। खाली प्लॉटों की गंदगी का तो और भी बुरा हाल है। लोग गाहे-बगाहे इन जगहों का इस्तेमाल कूड़ा-स्थल के रूप में करते हैं। नगर निगम की तरफ से न तो दवाइयों के छिड़काव होते हैं, न ही धुएं फैलाने वाली गाड़ियां आती हैं। हालत यह है कि दिल्ली के बाहरी क्षेत्र, जैसे प्रताप विहार, प्रेम नगर, बलजीत विहार, रोहिणी सेक्टर-20,21,22 इत्यादि कॉलोनियों में मच्छरों का बोलबाला है और डेंगू जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
ज्ञान वर्मा, प्रताप विहार, पार्ट-1, दिल्ली-86

प्रधानमंत्री का वादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश में जमा काला धन वापस लाने का वादा किया है। दुख की बात यह है कि आम आदमी का पैसा न सिर्फ काले धन कुबेरों के हाथ में है, बल्कि वह देश के बैंकों के भीतर भी सुरक्षित नहीं है। हरियाणा मे सुरंग के जरिये हुई बैंक डकैती में आम लोगों की जीवन भर की कमाई चली गई। मेरे ही एक डेबिट कार्ड से पिछले हफ्ते 75,000 रुपये अवैध तरीके से लूट लिए गए, जिसके लिए मुझे बैंक से एसएमएस अलर्ट भी नहीं मिला। पता नहीं, सरकार और सरकारी बैंकों को आम आदमी का दर्द समझ में आता भी है या नहीं।
गौरव दुआ, केशव पुरम, दिल्ली

कांग्रेस के प्रचार

लगता नहीं कि कांग्रेस पार्टी, जो आज सियासी बेरोजगारी से जूझ रही है, अपने उत्थान के लिए गंभीर है। जिस तरह से वह झूठे दावे और तथ्य के सहारे सत्ता पक्ष को घेर रही है, उससे क्या हासिल होगा, यह समझ में नहीं आता। कांग्रेस एवं अन्य कई दल प्रचार कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी ने चुनाव पूर्व वादा किया था कि काले धन की वापसी पर सरकार प्रत्येक नागरिक को तीन लाख रुपये देगी, जो कि सरासर झूठ है। फरवरी 2012 में विदेश में जमा काले धन पर एक आंकड़ा आया था, जिसके अनुसार प्रत्येक भारतीय नागरिक के हिस्से में तीन लाख रुपये आ सकता है, इतना कला धन विदेश में जमा है। कांग्रेस ने वर्तमान सरकार पर काला धन रखने वालों के नाम छिपाने का जो आरोप लगाया है, वह भी गलत है। सरकार ने सारे नाम अदालत को सौंप दिए हैं। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा मोदी सरकार को, जिसने शपथ लेते ही इस मुद्दे पर एसआईटी का गठन किया और अब सूची भी एसआईटी को सौंप दी है। सरकार के अब तक के प्रयासों से सिद्ध होता है कि मोदी सरकार काले धन की वापसी के लिए गंभीर है।
सतीश भारद्वाज
sat.nitu@gmail.com

क्रिकेट और विवाद

हर लोकप्रिय कर्म को विवादों से गुजरना होता है। जाहिर-सी बात है कि क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं। भारत में इस खेल को बेहद लोकप्रियता प्राप्त है। इसलिए इससे जुड़ी हर अच्छी खबर से सब वाकिफ होते हैं और हर बुरी खबर आगे चलकर विवाद बन जाती है। भारतीय क्रिकेट के वे दिन सभी क्रिकेट प्रेमी को याद होंगे, जब टीम के खिलाड़ी मैदान पर एकजुट दिखाई नहीं दे रहे थे। तब काफी हार मिली और कई क्रिकेटर अंदर-बाहर होते रहे। उस समय की कोचिंग को लेकर भी हो-हल्ला मचा था। उस दौर से टीम काफी कुछ सीख चुकी है।
दीपक कुमार, खानपुर, दिल्ली

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