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रेलवे के दोनो युनियन की रद्द हो सकती है मान्यता!

दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस युनियन और दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस की मान्यता रद्द हो सकती है। दक्षिण पूर्व रेलवे तृणमूल कांग्रेस ने दोनो युनियन पर बकाया को लेकर अलीपुर कोर्ट में केस दायर किया है। इसके बाद दक्षिण पूर्व रेलवे का सीपीओ हरकत में आ गये है और दक्षिण पूर्व रेलवे के सभी महाप्रबंधक से युनियन पर बकाया राशि का ब्यौरा 15 दिनों के भीतर मांगा है।

जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड का स्पस्ट निर्देश है कि जो भी ट्रेड युनियन पर कोई बकाया है, वह युनियन चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता है। 13 अप्रैल 2013 में हुये रेलवे के मान्यता चुनाव से पहले दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस युनियन और दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस द्वारा सीपीओ कार्यालय में लिखित रूप से दिया गया था कि छह माह के भीतर जो भी बकाया है, वह क्लीयर कर दिया जायेगा। परंतु इस दौरान करीब दस माह का समय बीत गया है और दोनो युनियन ने अबतक कोई बकाया क्लीयर नहीं किया है।

इस पर दक्षिण पूर्व रेलवे तृणमूल कांग्रेस की ओर से अलीपुर कोर्ट में दोनो युनियन की मान्यता रद्द कर करने के लिए याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने सीपीओ को नोटिश जारी कर बकाया कि जानकारी मांगी। जिस पर सीपीओ ने कोर्ट में दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय में दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस और दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस युनियन के कार्यालय का किराया करीब पांच-पांच लाख रुपये बकाया होने की जानकारी दी है। जबकि बिजली और पानी का शुल्क जोड़े जाने पर अधिक होगा।

इसके आलावा दक्षिण पूर्व रेलवे के पांचों डिविजन में दोनो युनियन द्वारा करीब पांच दर्जन रेलवे क्वार्टर पर कब्जा कर कार्यालय खोला गया है। जिसका किराया अलग है। जिसकी जानकारी कोर्ट में देने के लिए सीपीओ ने सभी मंडल प्रबंधक को 15 दिनों के भीतर दोनो युनियन पर बकाया किराया की जानकारी मांगी है। उल्लेखनी हैकि अकेले चक्रधरपुर रेल मंडल में दोनो युनियन के विभिन्न स्टेशनों पर करीब एक दर्जन कार्यालय है। बता दे कि चुनाव जीतने से पहले से ही दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस युनियन में विवाद चल रहा था।

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