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गुड़गांव मांगे कॉलेज-स्लोगन

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेक्टर नौ में छात्र कक्षाओं की कमी से जूझ रहे हैं। इससे छात्रों की कई कक्षाएं खुले आसमान के नीचे जमीन पर लगती हैं। ऑर्टस और कॉमर्स के विषयों की दस से ज्यादा कक्षाएं खुले मैदान में लगती हैं। कॉलेज में 2815 छात्र हैं लेकिन कक्षाओं की संख्या केवल 25 है। कॉलेज में तत्काल रूप से सात कमरों की जरुरत है। कक्षाओं की कमी को पूरा करने के लिए आर्टस के छात्रों की अधिकांश कक्षाएं बाहर ही लगानी पड़ती हैं। साइंस विषयों के छात्रों की कक्षाएं आर्ट्स ब्लॉक में लगाई जाती हैं। जिससे आर्ट्स के छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती है।


कॉलेज की प्राचार्या डॉ सुषमा चौधरी ने बताया कि कक्षाओं की कमी के कारण टाइम टेबल में काफी बदलाव करना पड़ता है। सुबह आठ बजे से ही कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। सर्दियों में दूर से आने वाले छात्रों को जल्दी कक्षाएं लेने में दिक्कत होती है लेकिन कॉलेज प्रबंधन के पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं होता है। देर शाम क्लास चलाने का विकल्प भी सफल नहीं है क्योंकि दूर से आने वाली छात्रओं को लौटने में देर हो जाती है। कॉलेज में छात्रों और शिक्षकों के अनुपात में भी बहुत अंतर है। कॉलेज में 60 शिक्षकों के  पद स्वीकृत हैं। वर्कलोड के हिसाब से 80 शिक्षकों की जरुरत है। कॉलेज में नियमित शिक्षकों की संख्या केवल 32 है जो जरुरत के लिहाज से एक तिहाई बैठती है।  

वजर्न-
‘कॉलेज में कई कक्षाएं बाहर लगानी पड़ती हैं। सात कमरों की सख्त जरुरत है। 14 कमरों के नए ब्लॉक की लिखित मांग की गई है। छात्रों की संख्या के लिहाज से कमरे बहुत कम पड़ते हैं।’
डॉ सुषमा चौधरी,प्राचार्या सेक्टर नौ पीजी कॉलेज

साइंस,कॉमर्स और ऑर्टस में शिक्षकों संख्या
विषय        संख्या         जरुरत
भौतिकी        00        02
रसायन        00        02
गणित        00        00
इकोनॉमिक्स    04        13
कॉमर्स        05        13
कम्यूटर        02        14
नोट- भौतिकी,रसायन और गणित विषयों में नियमित शिक्षक नहीं हैं। दूसरे कॉलेजों से छह माह के लिए प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक पढ़ाने आते हैं।
बॉक्स-
12 एकड़ क्षेत्र में फैला है कॉलेज
10 से ज्यादा कक्षाएं लगती हैं मैदान में
16 विभाग हैं द्रोणाचार्य कॉलेज में
80 शिक्षकों की जरुरत है कॉलेज में
14 कमरों के साइंस ब्लॉक की लिखित मांग भेजी है कॉलेज प्रबंधन ने
1600 छात्र हैं कॉमर्स में
200 छात्र पढ़ते हैं साइंस में
1000 छात्र पढ़ते हैं ऑर्टस में
छात्रों से बातचीत-
‘तीन साल से कई कक्षाएं बाहर लग रही हैं। हिस्ट्री,इंग्लिश आदि विषयों की ज्यादातर कक्षाएं बाहर लगती हैं। कई बार तो टीचर के सवाल भी सुनाई नहीं देते हैं।’
अमित कुमार,बीए तृतीय वर्ष
‘लिटरेचर की कई कक्षाएं बाहर ही लगती हैं। झुककर नोट्स बनाने में पीठ दर्द करने लगती है। बाहर क्लास लेने से चैप्टर की कई बातें समझ भी नहीं आती हैं।’
    खुशबु,बीए प्रथम वर्ष
‘बाहर क्लास लेते हुए तीन साल तो बीत गए। अब पीजी के दो साल भी बाहर ही क्लास लेकर बिताने पड़ेंगे। खुले में क्लास लेने से पढ़ाई से ध्यान भटकता है।’
राजबीर,बीए तृतीय वर्ष
‘बाहर क्लास चलने से शोर के कारण कई बार टॉपिक समझ नहीं आता है। कुछ कक्षाएं बेंच पर चलती हैं लेकिन शोर तो फिर भी होता है। बेंच पर भी नोट्स बनाने मुश्किल होता है।’
लक्ष्मी,बीए द्वितीय वर्ष
‘बाहर क्लास लेने के बाद टीचर के पास फिर से टॉपिक समझने के लिए चक्कर काटना पड़ता है। इससे एक ही टॉपिक को समझने में ज्यादा समय जाता है। क्लास के पास खेल का मैदान और कैंटीन होने से हल्ला भी होता है। दरी भी उपलब्ध नहीं होती है।’
लोकेश,बीकॉम तृतीय वर्ष
‘ क्लास में ज्यादा छात्र होने पर पीछे बैठने वाले छात्रों को कुछ भी सुनाई नहीं देता है। जिससे वे आपस में बातें करते हैं। बाहर आधा समय तो दूसरे छात्रों को शांत कराने में ही बीत जाता है।’
सीमा,बीए प्रथम वर्ष

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