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अब राजधानी में बहेगी एफडीआई की गंगा

दिल्ली में एफडीआई (प्रत्यक्ष पूंजी निवेश) देश के किसी भी शहर से ज्यादा आ रहा है। यह सब कुछ चुपचाप हो रहा है। नई बात यह कि दिल्ली को अब एफडीआई कैपिटल में तब्दील करने पर जोर होगा।देश का औद्योगिक जगत, चैम्बर और यहां की सरकार राजधानी क्षेत्र को एफडीआई के लिए सबसे उत्तम शहर के रूप में पेश करना चाहती है। सीआईआई के सालाना सम्मेलन में बुधवार को यह मुद्दा मुखर होकर उभरा। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में आगामी 2010 के राष्ट्रकुल खेलों की तैयारी तेजी से चल रही है। हम चाह रहे हैं कि खेल यादगार हों। यह शहर कैपिटल सिटी ही न रहे। दुनिया भर की प्रमुख कंपनियां यहां एफडीआई लेकर आएं। दिल्ली को एफडीआई के लिहाज से आकर्षक बनाने की शीला दीक्षित की ख्वाहिश को पूरा करती एसोचैम की एक रिपोर्ट कुछ समय पहले ही आई है। उसके अनुसार, दिल्ली और इसके साथ बसे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों में पिछले साल अप्रैल-नवम्बर 2007 के दौरान करीब 28 हाार करोड़ रुपये का एफडीआई आया। लगभग 1200 बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां सक्रिय हैं। एफडीआई के इस स्तर ने महाराष्ट्र को दूसर स्थान पर धकेल दिया है। सीआईआई सम्मेलन के दूसर दिन गोदरा ग्रुप के चेयरमैन जमशद गोदरा ने कहा कि इधर विदेशी कंपनियां बीते सालों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से आ रही हैं। अब कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि यह माहौल आगे भी जारी रहे। सम्मेलन में शिरकत करने आए अपोलो ग्रुप के चेयरमैन डा.प्रताप रड्डी ने कहा कि यह समूचा क्षेत्र मेडिकल हब के रूप में भी विकसित हो चुका है। बहुत बड़ी तादाद में विदेशों से रोगी इलाज के लिए आ रहे हैं। जाहिर है कि उनके आने से विदेशी मुद्रा भी आ रही है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव वगैरह में देश और दुनिया की एक से बढ़कर एक कंपनियां आ रही हैं।

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