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'चैपल ने कहा था, मेरे कार्यकाल में नहीं खेलने दूंगा'

'चैपल ने कहा था, मेरे कार्यकाल में नहीं खेलने दूंगा'

भारत के शीर्ष गेंदबाज जहीर खान ने आज खुलासा किया कि ग्रेग चैपल ने 2005 में उनसे कहा था कि जब तक वह टीम के कोच हैं, तब तक यह तेज गेंदबाज कभी भारत के लिए नहीं खेल पाएगा और उन्होंने इस ऑस्ट्रेलियाई कोच के कार्यकाल को भारतीय क्रिकेट का सबसे बुरा दौर कहा।

सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा 'प्लेइंग इट माइ वे' में ऑस्ट्रेलियाई कोच को लेकर हुए खुलासे का पूरी तरह से समर्थन करते हुए जहीर ने आज कहा कि भारतीय टीम का कोच बनाए जाने के बाद एक बार वह मेरे पास आए और बोले जहीर, मैं जब तक कोच रहूंगा तुम भारत के लिए नहीं खेलोगे।

कोच के ऐसी बात बोलने पर जब जहीर से उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हंसते हुए कहा, मुझे इतना बड़ा झटका लगा कि कुछ देर तक मैं प्रतिक्रिया ही नहीं दे पाया। मैं पूरी तरह से हैरान था। जैस कि मैं क्या करूं। क्या मैं विद्रोह करूं। क्या मैं कप्तान से पूछूं कि क्या हुआ। वह मुझे इस बारे में क्यों बोल रहा है। जहीर ने कहा कि चैपल का दो साल का कार्यकाल (2005-2007) भारतीय क्रिकेट का सबसे बुरा दौर था।

अपने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान 311 टेस्ट और 282 वनडे विकेट चटकाने वाले जहीर ने कहा कि मुझे एक चीज पता थी। उस व्यक्ति के अपने एजेंडा थे और वह निजी तौर पर इसे ले रहा था। उसके कुछ तय विचार थे और अगर आप उसकी योजना का हिस्सा नहीं हो तो आपको दरकिनार होने के लिए तैयार रहना चाहिए। उसने मेरा करियर खत्म करने की कोशिश की लेकिन मुझे लगता है कि 2006 के अंत में दक्षिण अफ्रीका में मैं और अधिक मजबूत बनकर उभरा।

बायें हाथ के इस तेज गेंदबाज ने कहा, टीम में मौजूद सीनियर खिलाडियों को लेकर भी उसे परेशानी थी। मैं टीम से जब लगभग एक साल तक बाहर रहा तब उसने भारतीय टीम में मेरी वापसी को रोकने का प्रयास किया। मुझे बाद में पता चला कि जब भी मेरे नाम की चर्चा होती तो वह (चैपल) किसी ना किसी तरीके से मेरी वापसी को तीन से चार महीने के लिए टाल देता था।

जहीर ने कहा कि यह मुश्किल दौरा था लेकिन मुख्य चुनौती नकारात्मकता को हटाकर सामने मौजूद काम पर ध्यान लगाना था। जहीर की टीम में वापसी के बाद चैपल विश्व कप के अंत तक चार और महीने के लिए भारत के कोच रहे और इस तेज गेंदबाज को यह समय अच्छी तरह याद है।

वर्ष 2011 में भारत की खिताबी जीत के दौरान सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले जहीर ने कहा कि उस समय हमारी उससे काफी बात नहीं होती थी, लेकिन मुझे अहसास हो रहा था कि मैं जंग जीत रहा हूं और वह हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है। केवल भारतीय क्रिकेटर ही क्यों आप जाकर ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा क्रिकेटरों से क्यों नहीं पूछते कि वह चैपल के बारे में क्या महसूस करते हैं। मैं शर्त के साथ कह सकता हूं कि यह हमारी तुलना में अधिक अलग नहीं होगा।

जहीर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2008 की घरेलू श्रृंखला (भारत ने चार टेस्ट की श्रृंखला 2-0 से जीती) में विरोधी ड्रेसिंग रूम में चैपल को देखकर कुछ करने गुजरने की सोची थी। उन्होंने कहा कि दौरे के दौरान चैपल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सलाहकार के रूप में आए थे। मैं निजी नजरिये से कह सकता हूं कि मैं उसे देखकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को बेताब था। उस चरण की नाराजगी ने मुझे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और मैं चैपल को साबित करना चाहता था।

 

 

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