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एक्चूरियल साइंस: इंश्योरेंस इंडस्ट्री की लाइफलाइन

एक्चूरियल साइंस: इंश्योरेंस इंडस्ट्री की लाइफलाइन

क्या है एक्चूरियल साइंस
एक्चूरियल साइंस विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें मैथमैटिकल और स्टेटिस्टिकल मेथड का इस्तेमाल कर फाइनेंस और इंश्योरेंस से संबंधित सभी पहलुओं की गणना की जाती है। इसके जरिए इन क्षेत्रों में होने वाले आय-व्यय की कैल्कुलेशन की जाती है। एक्चूरियल साइंस में विषय के रूप में मैथ्स, स्टेटिस्टिक्स, इकोनॉमिक्स, इन्वेस्टमेंट्स, प्रोबेबिलिटी, फाइनेंस, फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स, कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग और ऑपरेशनल रिसर्च आदि को पढ़ाया जाता है।

साधारण शब्दों में कहा जाए तो एक्चूरियल साइंस इंश्योरेंस उद्योग की जीवन रेखा की तरह है। इसके बगैर इंडस्ट्री का चलना अब काफी मुश्किल है। करियर संभावनाओं के लिहाज से यह विषय जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी इसमें गहन जानकारी का होना भी है। एक्चूरियल साइंस में अच्छी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण लेने के साथ इसमें अनुभव होने पर एक बेहतर एक्चुरी बना जा सकता है।

भारत में अभी यह विषय छात्रों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। लोगों को इसके बारे में जो थोड़ी-बहुत जानकारी है, उसके आधार पर वह इसे बीमा क्षेत्र खासकर जीवन बीमा से जोड़ कर देखते हैं, जबकि वास्तविकता में इस विषय का दायरा बीमा क्षेत्र के अलावा इन्वेस्टमेंट, फाइनेंशियल प्लानिंग एंड मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों तक है। एक्चूरियल साइंस के पेशेवरों को एक्चुरी कहा जाता है। इनका कार्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों की दीर्घकालिक वित्तीय योजनाओं के लिए आकलन और सुझाव देना होता है।

एक्चुरी का कार्य
मुख्य रूप से एक्चुरी की दो भूमिकाएं होती हैं। पहली भूमिका में वह विनियामकों के प्रति जवाबदेह होता है, इसके लिए उसे इंस्टीटय़ूट ऑफ एक्चुरीज ऑफ इंडिया (आईएआई) का फेलो होना चाहिए।
अपनी दूसरी भूमिका में एक्चुरी किसी संस्थान विशेष से मिले कार्यों (जिसमें एक्चूरियल साइंस की जरूरत हो) को पूरा करने या करवाने की जिम्मेदारी निभाता है।
एक्चुरी भविष्य की अनिश्चित स्थितियों के वित्तीय प्रभाव का आकलन करने में सक्षम होते हैं। अपने इस कौशल का इस्तेमाल करके वह पूरे विश्वास के साथ आर्थिक फैसलों को लेने में मदद करते हैं। इस कार्य के लिए वह बीती स्थितियों का विश्लेषण, भविष्य में संभावित स्थितियों का आकलन और उनमें निहित जोखिम के स्तर का मूल्यांकन करते हैं।
पेंशन प्लान, ग्रेच्युटी स्कीम और विभिन्न कर्मचारी फंड के लिए वित्तीय ढांचा निर्मित करने के अलावा एक्चुरी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन करने का कार्य करते हैं। इसके साथ ही उनके पास जनता के वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी दायित्व होता है। अब यह दायरा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, बैंकिंग और हेल्थ केयर आदि क्षेत्रों तक विस्तार ले चुका है।

प्रवेश प्रक्रिया
संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होना और उसमें उत्तीर्ण होना जरूरी है।

इंस्टीटय़ूट ऑफ एक्चुरीज ऑफ इंडिया: यह संस्थान एक संवैधानिक निकाय है, जो एक्चुरी के लिए मेंबरशिप जारी करता है। जिस तरह की प्रक्रिया से आईसीएआई चार्टर्ड एकाउंटेंट तैयार करती है और उन्हें अपनी मेंबरशिप देती है, आईएआई (इंस्टीटय़ूट ऑफ एक्चुरीज ऑफ इंडिया) भी उसी तरह कार्य करती है। आईएआई के मेंबरशिप प्रोग्राम में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता अंग्रेजी और मैथमेटिक्स विषय के साथ 12वीं पास होना है। मेंबरशिप हासिल करने के लिए इस संस्थान के कुल 15 पेपर पास करने होते हैं। इन्हें तीन सीरिज में बांटा गया है। हर सीरिज के साथ मेंबरशिप का एक प्रकार जुड़ा हुआ है। पहली सीरिज पास करने पर एसोसिएट मेंबरशिप मिलती है तो दूसरी सीरिज पास करने पर एफिलिएट मेंबरशिप। आखिरी सीरिज पास करने और कुछ वर्षो के कार्य अनुभव के बाद फेलो मेंबरशिप हासिल होती है। संस्थान में प्रवेश के लिए एक्चूरियल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (एसीईटी) पास करना होता है। इसे पास करने के बाद स्टूडेंट मेंबरशिप मिलती है और पहली सीरिज की परीक्षा में शामिल होने का मौका।

एक्चुरी मेंबरशिप के लिए योग्यता
उम्र 18 वर्ष होना जरूरी है।
मैथ्स या स्टैटिस्टिक्स में 85 फीसदी अंकों के साथ 12वीं या समकक्ष या मैथ्स के साथ 55 फीसदी अंकों के साथ ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री यामैथ्स या स्टेटिस्टिक्स के साथ एमबीए या पीजीडीबीए या इंजीनियरिंग या सीए या एमबीए (फाइनेंस) या एमसीए या सीए, आईसीडब्ल्यूएआई, आईसीएआई, आईएफएआई उत्तीर्ण एसीईटी के लिए आवेदन

इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित इस परीक्षा में 55 सवाल पूछे जाते हैं। साल में दो बार (दिसंबर और जून) देश के 40 से ज्यादा शहरों में इसका आयोजन होता है।

इन क्षेत्रों में मिलेगी नौकरी
इंश्योरेंस कंपनी (लाइफ/ जनरल/ हेल्थ)
रीइंश्योरेंस कंपनी
पेंशन फंड
कंसल्टेंट्स
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट
इंवेस्टमेंट फर्म
एम्प्लॉई बेनिफिट डिपार्टमेंट्स
गवर्नमेंट डिपार्टमेंट
एकेडमिक्स
रिस्क मैनेजमेंट

संभावनाएं
देश में बीमा कारोबार का नियमन करने वाली संस्था आईआरडीए ने बीमा कंपनियों के लिए एक्चूएरी की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। पहले बीमा कंपनियों की संख्या ज्यादा नहीं थी, मगर आज देश में जीवन बीमा और गैर-जीवन बीमा की 50 से ज्यादा कंपनियां कार्यरत हैं। इससे एक्चुरी के लिए मौकों की संख्या में स्वाभाविक रूप से इजाफा हुआ है।

प्रमुख कोर्स
बीएससी (एक्चूरियल साइंस)
एमएससी (एक्चूरियल साइंस)
पीजी डिप्लोमा इन एक्चूरियल साइंस

योग्यता
बैचलर कोर्स:
12वीं पास करने के बाद एक्चूरियल साइंस के बीएससी कोर्स में प्रवेश लिया जा सकता है। इसके लिए 12वीं में मैथ्स का होना जरूरी है।


प्रमुख संस्थान

नर्सी मोंजी इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
www.nmims.edu 

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
www.gndu.ac.in

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा
www.kuk.ac.in

बिरला इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
www.bimtech.ac.in

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
www.bhu.ac.in

यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई
www.unom.ac.in

सेंट्रल यूनिवर्सिटी, राजस्थान
www.curaj.ac.in

यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई
www.mu.ac.in

बेरहामपुर यूनिवर्सिटी, ओडिशा
www.buodisha.edu.in

एमिटी स्कूल ऑफ इंश्योरेंस, बैंकिंग एंड एक्चूरियल साइंस, नोएडा
www.amity.edu/asibas

कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली यूनिवर्सिटी
www.du.ac.in

डिपार्टमेंट ऑफ स्टैटिस्टिक्स, पटना यूनिवर्सिटी, पटना
www.patnauniversity.ac.in

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़
www.amu.ac.in

आरएनआईएस कॉलेज ऑफ इंश्योरेंस, नई दिल्ली
www.rniscollege.com

जयपुरिया इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ
www.jaipuria.ac.in/

डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी, फैजाबाद
www.rmlau.ac.in/

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