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दिल्ली में चुनाव होना तय

दिल्ली में विधानसभा चुनाव होना तय हो गया है। भाजपा, ‘आप’ और कांग्रेस ने सोमवार को उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार गठन से इंकार कर दिया। जंग अब विधानसभा भंग करने के लिए किसी भी समय अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। 

दिल्ली में इस साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। उपराज्यपाल ने सरकार गठन के लिए सबसे पहले सुबह भाजपा विधायक दल के नेता जगदीश मुखी को बुलाया। भाजपा ने जगदीश मुखी को बातचीत के लिए विधायक दल का नेता बनाया था।

इस बातचीत के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय भी मौजूद थे। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता हारून युसुफ और अंत में शाम को ‘आप’ पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया भी नजीब जंग से मुलाकात के लिए पहुंचे। इसके बाद मनीष सिसौदिया ने बाहर आकर दिल्ली में चुनाव की बात कही।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने उपराज्यपाल को दिल्ली में सरकार गठन की संभावना तलाशने के लिए 11 नवंबर तक का समय दिया था। इसी के मद्देनजर उन्होंने तीनों राजनीतिक दलों से बातचीत कर उनकी राय जानी। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग 25 नवंबर को खाली तीन सीटों पर उपचुनाव कराने का ऐलान कर चुका है। ऐसे में सरकार के गठन पर जल्द फैसला लेना जरूरी हो गया है। अब उपराज्यपाल राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।

भाजपा क्यों तैयार
1.  महाराष्ट्र-हरियाणा में जीत के बाद पार्टी बेहद उत्साहित है
2. सुप्रीम कोर्ट की टिप्प्णी तल्ख थी, केंद्र सरकार पर दबाव अधिक था
3. चुनाव आयोग ने उप चुनाव घोषित कर दिए, फैसला जल्द लेना था
4. कांग्रेस और ‘आप’ के विधायक साथ आने को तैयार नहीं हुए, सदस्यता जाने का खतरा था
5. पार्टी में संदेश था उप चुनाव हारने के डर से नहीं करा रही चुनाव

दिल्ली को क्या फायदा
1. नई सरकार नए विकास कार्य शुरू करा सकेगी
2. पेंशन और राशन जैसे मामलों पर निर्वाचित सरकार बेहतर फैसले कर सकती है
3. केंद्र से संबंधित मंत्रालयों से संबंधित मामलों को मनवाने के लिए राज्य सरकार प्रभावी भूमिका निभा सकती है
4. सरकार न होने का हवाला देकर विधायक काम नहीं करा पा रहे थे

 

 

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