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पहला बुलावा प्रथमेश गणेशजी को

आपने देश का कोई ऐसा मंदिर देखा है, जहां भगवान के चरणों में शादी के कार्डस का अंबार लगा रहता हो। चलिए चलते हैं ऐसे मंदिर में, जहां लोग अपनी शादी का पहला निमंत्रण-पत्र भेजते हैं। यह मंदिर है राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर के किले में स्थित गणेश मंदिर। कहते हैं, कहीं भी कोई शादी-ब्याह हो, पहला कार्ड रणथंभौर के गणेश जी के नाम भेजा जाता है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिले के लोग अपने घर में मांगलिक कार्य होने पर पहला कार्ड रणथंभौर वाले गणेश जी के ही नाम भेजते हैं। उसके बाद फिर किसी और को कार्ड पोस्ट किया जा जाता है। कार्ड के ऊपर पते में लिखा जाता है- श्री गणेश जी, रणथंभौर का किला, सवाई माधोपुर, राजस्थान। पुजारी इस डाक को भगवान गणेश के चरणों में रख देते हैं। गणेश जी को आमंत्रण इसलिए, कि उनका एक नाम विघ्नेश्वर भी है। विश्वास है कि वे सारे कार्य निर्विघ्न संपन्न कराते हैं। गणेश प्रथम पूज्य भी हैं, इसलिए भी पहला कार्ड उनके नाम भेजा जाता है।

तेरहवीं सदी का मंदिर- कहा जाता है यह मंदिर 1299 ईसवी में रणथंभौर के राजा हमीर ने बनवाया था। युद्ध के दौरान राजा के सपने में गणेश जी आए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके बाद राजा की युद्ध में विजय हुई और उन्होंने किले में मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर परिसर में गणेश जी, उनकी पत्नी ऋद्धि और सिद्धि के साथ ही बेटे शुभ-लाभ की स्थापना की गई है। गणेश के वाहन मूषकराज भी मंदिर में विराजमान हैं। गणेश चतुर्थी के दिन किले के मंदिर में भव्य समारोह होता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साल के बाकी दिनों में हर बुधवार को यहां ज्यादा श्रद्धालु आते हैं, क्योंकि बुधवार गणेशजी का दिन माना जाता है। किले के परिसर में स्थित मंदिर के बगल से गुप्त गंगा नामक छोटी-सी धारा बहती है। साथ ही इसके आसपास पक्षियों का बसेरा देखने को मिलता है, जो बड़ा ही मनोरम नजारा पेश करते हैं।

कैसे पहुंचें- सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित है रणथंभौर का किला। इस किले के मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद लगभग एक किलोमीटर पैदल चलने पर गणेश जी का मंदिर आता है।

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