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राजनीति में पीएचडी होने के बावजूद हमेशा रहीं सियासत से दूर

बेशक, डाक्टर तजीन फात्मा राजनीति में पीएचडी किए हुए हैं लेकिन, अभी तक हमेशा ही सियासत से दूर रहीं। सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री मोहम्मद आजम खां की पत्नी होने के बावजूद कभी भी वीवीआईपी ट्रीटमेंट को खुद पर हावी नहीं होने दिया। लेकिन, अब उन्होंने सियासत की राह पर कदम बढ़ा दिया है।

सपा के फायरब्रांड नेता एवं कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां की पत्नी डा. तजीन फात्मा अब राज्यसभा सासंद होना तय हो गया है। राज्यसभा पहुंचते ही उनका सियासी सफर शुरू हो जाएगा। हालांकि, अभी तक कभी भी उनकी राजनीति में दिलचस्पी देखने को नहीं मिली। मोहम्मद अली जाैहर विश्वविद्यालय में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक कार्यक्रम में भले ही उन्होंने मंच साझा किया लेकिन, द्वितीय पंक्ति में।

इतना ही नहीं, यदि आजम खां घर पर नहीं होते हैं और कोई फरियादी वहां पहुंचता है तो उसकी बात भले ही सुन लेती हैं लेकिन, समस्या के निदान के लिए कभी किसी अधिकारी को फोन नहीं करतीं। एक आम महिला की तरह अपने पति यानी मोहम्मद आजम खां को संबंधित फरियाद के बारे में जरूर बता देती हैं। आजम खां के परिवार में उनके अलावा कोई भी राजनीतिक व्यक्ति नहीं है। चुनाव के दौरान आजम पर आयोग द्वारा पाबंदी लगाए जाने पर उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला ने भले ही दो-तीन सभाओं में आजम का संदेश पढ़कर सुनाया, दिल्ली में धरना के दौरान मौजूद रहे लेकिन, पत्नी उस वक्त भी किसी मंच पर वोट या सपोर्ट के लिए नहीं र्गई।

 
ठुकरा चुकी हैं लालबत्ती
पूर्व में प्रदेश सरकार डा. तजीन फात्मा को उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष के लिए नामित किया था। उस वक्त भी डा. तजीन फात्मा ने सरकार की इस पेशकश को ठुकराते हुए महत्वपूर्ण पद को लेने से इंकार कर दिया था। हालांकि, सरकार ने यह पेशकश उनकी योग्यता को देखते हुए की थी।
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बदायूं के डिग्री कालेज से हरुई सेवानिवृत्त
डाक्टर तजीन फात्मा लंबे समय तक राजकीय डिग्री कालेजों में प्रवक्ता रहीं। रामपुर के रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महिला महाविद्यालय में सेवारत रहने के बाद उनका स्थानांतरण राजकीय डिग्री कालेज बदायूं के लिए कर दिया गया। करीब छह साल पहले बदायूं से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।

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जाैहर विवि में करती हैं सहयोग
आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जाैहर विश्वविद्यालय में पूरी दिलचस्पी लेती हैं। अक्सर वहां जाती हैं और अपने शैक्षिक अनुभव का फायदा पहुंचाने के लिए यूनिवर्सिटी में काम करती हैं। इससे इतर, वह हमेशा ही सरकारी तामझाम से भी बचना पसंद करती रही हैं।

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