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मुंडा की जाति की जांच शुरू

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के कथित रूप से आदिवासी न होने के मामले की जांच शुरू हो गई है। शिकायत करने वाले पूर्व सांसद व कांग्रेस नेता बागुन सुम्बरूई और पूर्व सैनिक लालजी राम तियु ने सोमवार को चार सदस्यीय जांच कमेटी के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए और इसके पक्ष में सबूत पेश किए।
सुनवाई जांच दल के प्रमुख सदस्य सह डीडीसी डॉ. लाल मोहन महतो के कार्यालय कक्ष में हुई। इस दौरान कमेटी के तीन अन्य सदस्य आईटीडीए के निदेशक परमेश्वर भगत, धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी प्रेम रंजन और जिला कल्याण पदाधिकारी आशीष कुमार सिन्हा मौजूद थे।

प्रमंडलीय आयुक्त ने दिया था जांच का आदेश
कोल्हान के प्रमंडलीय आयुक्त आलोक गोयल के द्वारा पिछले महीने उपायुक्त डॉ. अमिताभ कौशल को जारी आदेश के आलोक में यह जांच शुरू हुई है। असल में सुम्बरूई और तियु ने अनुसूचित जनजाति आयोग से लिखित शिकायत की थी कि अर्जुन मुंडा का जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। इसके आलोक में आयोग ने आयुक्त को जांच का आदेश दिया था।

जांच दल को सौंपे ये सबूत
जमशेदपुर प्रखंड से जारी अर्जुन मुंडा की मां सायरा मुंडा का जाति प्रमाणपत्र और 1912-13 का खतियान, जिसमें मुंडा के दादा का नाम चरण तमरिया व जाति के कॉलम में तमड़िया दर्ज है। 1963 का खतियान, जिसमें नाम चरण सांडिल और जाति ‘हो’ दर्ज है। मुंडा के मूल निवास खूंटपानी प्रखंड के दोपाई गांव के ग्राम मुंडा सिंगराई तियु का वह प्रमाणपत्र, जिसमें उन्होंने चरण तमड़िया को तमड़िया जाति का होना प्रमाणित किया है। साथ ही पश्चिमी सिंहभूम के डीसी से हासिल सूचना अधिकार की वह कॉपी, जिसमें उन्होंने बताया है कि जाति प्रमाणपत्र मूल निवास वाले प्रखंड कार्यालय से जारी होना चाहिए। लालजी राम तियु का कहना है कि इस हिसाब से अर्जुन मुंडा का जाति प्रमाणपत्र खूंटपानी प्रखंड से जारी होना चाहिए। मगर जमशेदपुर के घोड़ाबांधा में खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री के दस्तावेज के आधार पर मुंडा की मां के नाम से जाति प्रमाणपत्र और उस जमीन की पिछले साल कटाई गई लगान रसीद। इन सभी की सच्ची प्रतिलिपि या फोटो कॉपी जांच कमेटी को सौंपी है।

मेरा उद्देश्य मुंडा को चुनाव लड़ने से रोकना है : बागुन
उपायुक्त कार्यालय परिसर में बागुन सुम्बरूई ने मडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य अर्जुन मुंडा को चुनाव लड़ने से रोकना है। हालांकि, चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इसलिए इतनी जल्दी यह संभव नहीं लगता, लेकिन वे चाहते हैं कि कथित धोखाधड़ी व फरेब से हसिल जाति प्रमाणपत्र को रद्द किया जाए और इसके आधार पर आदिवासी होने का लाभ लेने वाले मुंडा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि ये लोग तमड़िया के नाम पर अपनी जमीन सामान्य लोगों को बेच देते हैं, जबकि मुंडा बनकर सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। यह सरासर गलत है।

 

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