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विधानसभा चुनाव की ओर बढती नजर आ रही है दिल्ली

विधानसभा चुनाव की ओर बढती नजर आ रही है दिल्ली

भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नई सरकार के गठन के खिलाफ होने और आठ महीने पुरानी राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त करने के लिए नया जनादेश लेने की मांग किए जाने के साथ ही दिल्ली विधानसभा चुनाव की ओर बढती नजर आ रही है।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने सोमवार को तीनों राजनीतिक दलों से मुलाकात की और संकेत हैं कि वह विधानसभा भंग करने के लिए किसी भी समय अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज सकते है। भाजपा ने सरकार बनाने के लिए उपराज्यपाल के आमंत्रण को नकार दिया, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे तत्काल चुनाव कराये जाने के पक्ष में हैं।

भाजपा के सतीश उपाध्याय और जगदीश मुखी, कांग्रेस के हारून यूसुफ और आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल एवं मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल से मुलाकात की। उपराज्यपाल निवास की एक विज्ञप्ति में कहा गया है, उपरोक्त सभी दलों ने सरकार बनाने के प्रति अपनी असमर्थता जताई है। उपराज्यपाल राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें दिल्ली में सरकार के गठन की संभावना तलाशने के लिए 11 नवम्बर तक का समय दिये जाने के मद्देनजर राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श किया।
 
उच्चतम न्यायालय दिल्ली विधानसभा को जल्द से जल्द भंग किए जाने की मांग संबंधी आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार के इस्तीफे के बाद से दिल्ली विधानसभा निलंबित है और यहां राष्ट्रपति शासन लागू है।
 
फिलहाल सहयोगी अकाली दल के एक सदस्य के साथ भाजपा के 29 विधायक हैं और उसे बहुमत साबित करने के लिए पांच और विधायकों के समर्थन की जरूरत होती क्योंकि भाजपा के तीन विधायकों के लोकसभा के लिए चुन लिये जाने के कारण विधानसभा के सदस्यों की संख्या अभी 67 है।

दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में भाजपा 31 सदस्यों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और उसे अकाली दल के एक सदस्य का समर्थन प्राप्त था। तब बहुमत से चार सीटें कम होने के कारण भाजपा ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया था और कहा था कि वह सत्ता हासिल करने के लिए कोई अनुचित रास्ता नहीं अपनाएगी।

इसके बाद 28 सदस्यों वाली आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के आठ सदस्यों के समर्थन से सरकार का गठन किया था। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार ने 14 फरवरी को उस समय इस्तीफा दे दिया जब भाजपा और कांग्रेस के विरोध के कारण जन लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो सका। दिल्ली में 17 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।

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