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अलम उठाओ शह-ए-कर्बला को करो याद

बिछा के फर्श ए अजा फातमा को याद करो, अलम उठाओ शह- ए-कर्बला को याद करो। ये वो अलम है जिससे शहीदों की शान है, कुर्बानियों का नाम वफा का निशान है, बच्चों की आबरू है सकीना की जान है अलम अब्बास का..।

जैसे ही कासिम अली ने यह नौहा पढम, लोग हाथों में अलम लिए जाफरिया मसजिद के गेट पर खड़े हो गए और या हुसैन, प्यासे हुसैन का नारा बुलंद करने लगे। यह नजारा था रविवार की रात अंसार नगर स्थित जाफरिया मसजिद का। अंजुमन-ए-जाफरिया की ओर से मुहर्रम की आठवीं तारीख दो नवंबर को अलमदार-ए- हुसैनी का जुलूस निकाला जाता है। जुलूस में लगभग एक दर्जन से अधिक अलम थे। या अब्बास की सदाओं से गूंजा चर्च रोड: जुलूस में शामिल लोग स्याह कपडम पहने हुए थे। मसजिद परिसर से निकलकर जुलूस चर्च रोड, टैक्सी स्टैंड, उर्दू लाइब्रेरी होते हुए वूल हाउस तक गया।

वहां से जुलूस डॉ फतेउल्लाह रोड होते हुए मसजिद पहुंचा। जुलूस में शामिल हर शख्स हाय अब्बास, प्यासे अब्बास का नारा लगाते हुए छाती पीट रहा था। उलेमा ने कहा बहादूर थे हजरत-ए-अब्बास: जुलूस से पहले जाफरिया मसजिद में मजलिस-ए-गम का आयोजन किया गया। मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी ने मजलिस को खेताब करते हुए कहा कि हजरत-ए-अब्बास भी अपने बाप हजरत-ए-अली की तरह बहादूर थे।

हजरत-ए-अली को जंग-ए- खैबर में रसूल-ए-अकरम ने अलम दिया था। वह अलम अली ने अब्बास के हवाले किया और कहा बेटा इस अलम के अलमदार तुम हो। हजरत-ए-अब्बास ने जब देखा खैम-ए-हुसैनी से हाय प्यास की सदा बुलंद हो रही है। वह मशकीजा लेकर पानी लाने नहर-ए-फरहात चले गए। यजीदी फौज उन पर हमला कर दिया। हमले में हजरत-ए-अब्बास का दोनों हाथ कट कर जमीन पर गिर गया। हजरत-ए-अब्बास घोडम्े से गिरे और हुसैन को आवाज दी। हुसैन- ए-मजलूम अपने भाई की लाश लेकर खैमा पर आए और आवाज दी बीवी जैनब अलम तो आ गया मगर अलमदार नहीं आया। कल निकलेगा मुहर्रम की नवमी व पहलाम का जुलूस: मुहर्रम की नवमी व पहलाम का जुलूस चार नवंबर को निकाला जाएगा।

अपने-अपने क्षेत्र से जुलूस सुबह आठ बजे निकलेगा और दिन के 11.30 बजे जुलूस अलबर्ट एक्का चौक पहुंचेगा। वहां से सभी जुलूस सामूहिक रूप से टैक्सी स्टैंड के पीछे से लेक रोड जाएगी। यहां पर इमाम बख्श अखाडम, धवताल अखाडम व लीलू अली अखाडम के खलीफाओं का मिलन होगा। इसके बाद सभी जुलूस मेन रोड सर्जना चौक, शहीद चौक होते हुए श्रद्धानंद रोड से महावीर चौक जाएगा। वहां से सभी जुलूस का कर्बला में फातिहा के बाद समापन किया जाएगा।

आगे रहेगा धवताल अखाडम का जुलूस ’मोहर्रम के जुलूस में इस बार धवताल अखाडम सबसे आगे होगा। यह निर्णय रविवार को एडीएएम विधि-व्यवस्था की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। किसका आखाडम आगे होगा।

इसे लेकर विवाद चल रहा था। ’एसडीओ कार्यालय में इसे लेकर अखाडम्े के खलीफा की बैठक महावीर मंडल व महानगर दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों के साथ हुई। एसडीओ के निर्देश और सभी अखाडम के खलीफा की सहमति के बाद इसके लिए एक जूरी कमेटी का गठन किया गया। जूरी ने ही यह निर्णय सुनाया। ’मुसलिम यूथ फोरम की ओर से मुहर्रम की अजमत और दस्तान-ए- कर्बला पर रविवार को जलसा का आयोजन किया गया। अंजुमन प्लाजा में आयोजित इस जलसा को खेताब करते हुए उलेमाओं ने यौम- ए-आशुरा (दसवीं मुहर्रम को) के रोजा की अहमियत के बारे में बताया।

कहा कि इस दिन जो शख्स रोजा रखता है, अल्लाहपाक ऐसे शख्स के एक साल के गुनाह को माफ कर देता है। ’डोरंडा में रविवार को आठवीं का जुलूस निकाला गया। देर रात अपने-अपने क्षेत्र से जुलूस निकलकर युनूस चौक पर जमा हुआ।

वहां पर अखाडमधारियों ने अस्त्र-शस्त्र के खेल का प्रदर्शन किया। अध्यक्ष अशफर अंसारी ने बताया कि डोरंडा में नवमी व पहलाम का जुलूस दो नवंबर को निकाला जाएगा। ’कर्बला चौक समेत शहर तकरीबन हर इमामबाडम में रविवार की शाम अकीदतमंदो की भीडम् उमडम् पडम्ी। इमाम ए हुसैन के नाम से लोगों ने इमामबाडम में आठवीं मुहर्रम का फातिहा करायी। अपनी तथा अपनों की खैर-खूबी के लिए दुआ भी की। कर्बला चौक के पास मेला भी लगाया गया। मेले में लगे झूला में बच्चों ने खूब मस्ती भी की।

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