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दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ

दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ

दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आप के द्वारा सरकार बनाने में असमर्थता दिखाने के बाद राजधानी में चुनाव होने के आसार प्रबल हो गए हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के कार्यालय ने कहा है कि भाजपा, कांग्रेस और आप ने सरकार बनाने में असमर्थता जताई है। इसी बीच आप नेता मनीष सिसौदिया ने उपराज्यपाल से मिलने के बाद कहा कि उपराज्यपाल ने हमें बताया है कि वह दिल्ली की राजनीतिक स्थिति पर आज शाम केन्द्र को रिपोर्ट भेजेंगे।

दिल्ली विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के अल्पमत सरकार बनाने के इच्छुक नजर नहीं आने को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी की विधायिका के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी सिद्धांत: पहले ही फैसला कर चुकी है कि वह अल्मत सरकार नहीं बनाएगी और केन्द्रीय नेतृत्व ने भी पार्टी की दिल्ली इकाई से कह दिया है कि वह चुनावों की तैयारी शुरू कर दे।

दिल्ली भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी ने सरकार गठन की किसी पेशकश को मंजूर नहीं करने का निर्णय किया है। हम चुनाव में जाना पसंद करेंगे। उधर सरकार के सूत्रों ने बताया कि सरकार गठन को लेकर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर रहे दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग राजनीतिक स्थिति के बारे में फैसला कर लेंगे।

दिल्ली विधानसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले उप चुनाव के वास्ते नामंकन भरने की अंतिम तिथि पांच नवंबर है और अगर सरकार गठन की कोई संभावना उभर कर सामने नहीं आती है तो उप राज्यपाल इन उप चुनावों से बचने के लिए शीघ्र ही दिल्ली विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।

उधर, दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने सरकार गठन की संभावना पर चर्चा के लिए सभी पार्टियों को आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सरकार गठन को लेकर हो रही देरी पर केंद्र सरकार से नाखुशी जाहिर की थी। इसके बाद जंग ने यह पहल की है।

आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के 14 फरवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से 17 फरवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। भाजपा के तीन विधायकों के लोकसभा के लिए निर्वाचित हो जाने के बाद विधानसभा के सदस्यों की संख्या 70 से 67 हो गई है।

भाजपा के विधायकों की संख्या 31 से घटकर 28 हो गई है। इसके पास अकाली दल के एक विधायक का समर्थन है। विनोद कुमार बिन्नी के निष्कासन के बाद आप के विधायकों की संख्या घटकर 27 हो गई है। विधानसभा में कांग्रेस के आठ विधायक हैं। एक निर्दलीय और एक विधायक जनता दल (युनाइटेड) से भी हैं।

इस बीच राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने के बीच आम आदमी पार्टी ने उनसे मुलाकात से पहले भाजपा का रुख जानना चाहा।
उपराज्यपाल नजीब जंग को लिखे पत्र में आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह सरकार के गठन पर भाजपा के रुख के बारे में जानना चाहते हैं जो विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।

केजरीवाल ने यह पत्र उपराज्यपाल को तब लिखा जब उन्होंने आप प्रमुख को दिल्ली में सरकार बनाने की संभावना पर विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित किया।
केजरीवाल ने लिखा, मुझे विश्वास है कि आपकी भाजपा के साथ पहले ही चर्चा हुई होगी जो सबसे बड़ी पार्टी है। मैं आपका आभारी रहूंगा, अगर आप इस बारे में उनके औपचारिक रूख से हमें अवगत करायेंगे।

उधर, कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा को तुरंत भंग कर चुनाव कराये जाने की मांग की है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता हारुन यूसुफ उपराज्यपाल नजीब जंग के दिल्ली में सरकार की संभावनाएं टटोलने के लिए सभी राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के लिए बुलाने पर आज उनसे मिले। उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस दिल्ली में फिर से चुनाव चाहती है और उपराज्यपाल को विधानसभा तुंरत भंग कर चुनाव कराने चाहिए।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी पर पिछले दरवाजे से सत्ता हथियाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के 15 वर्ष के शासनकाल में दिल्ली में चौतरफा विकास हुआ था और अब यह बिल्कुल ठप्प पडा हुआ है। भाजपा दोमुंही बातें कर रही है। कांग्रेस के 15 वर्ष के शासनकाल में दिल्ली का जो विकास हुआ था उसके बूते पार्टी चुनाव मैदान में पूरी मजबूती से उतरेगी।

 

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