DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सबसे अधिक सीटों पर लड़ती है बसपा

प्रदेश के पिछले दो विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक उम्मीदवार खड़े करने का रिकॉर्ड बहुजन समाज पार्टी के नाम रहा है। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी उतारने के मामले में भाजपा के बाद दूसरे नंबर पर थी।

संयुक्त बिहार में हुए उस चुनाव के वक्त झारखंड वाले हिस्से की 81 सीटों में से भाजपा के 71 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। जबकि बसपा ने 60 पर दांव आजमाया था। इन में से 59 की जमानत जब्त हो गई थी। केवल जरमुंडी से हरिनारायण राय अपना जमानत बचाने में कामयाब हुए थे। राय दूसरे स्थान पर रहे थे। 2009 में बसपा ने 78 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए। इनमे से एक भी नहीं जीत सके और केवल दो लोगों को ही अपनी जमानत राशि बचाने में कामयाबी हासिल हुई। डालटनगंज से अनिल चौरसिया तीसरे नंबर पर और हुसैनाबाद से कुशवाहा शिवपूजन मेहता दूसरे स्थान पर आए। इस चुनाव में उम्मीदवार उतारने के मामले में झामुमो दूसरे नंबर पर था।

2005 में जमानत जब्त के मामले में बसपा अव्वल
सबसे अधिक उम्मीदवार उतारने और सबसे अधिक उम्मीदवार का जमानत जब्त होने दोनों ही मामलों में 2005 चुनाव का रिकॉर्ड बसपा के नाम ही है। बसपा ने 75 प्रत्याशी खड़े किए। एक भी नहीं जीता और 73 की जमानत जब्त हो गई। केवल हुसैनाबाद से कुशवाहा शिवपूजन मेहता और गोमिया से देवनारायण प्रसाद अपना जमनात बचा सके। 2005 में भाजपा ने 63 प्रत्याशी खडे़ किए। 30 जीते और 8 की जमानत जब्त हो गई।

हर बार हार के बाद उम्मीदवार देने का मतलब
बसपा के संस्थापक कांशीराम का एक चर्चित वक्तव्य है कि राजनीति में बहुजन विकल्प देने के लिए अधिक से अधिक उम्मीदवार खड़े करो। इस कारण बसपा दलित वोटों की संभावना वाले इलाकों में अपने प्रत्याशी खड़ी करती रही है। मायावती के प्रभाव में विस्तार के बाद बहुजन के नेतृत्व में सर्वजन की सियासी नीति के तहत प्रदेश में अपनी संभावना टटोलने के लिए बसपा को अपने प्रत्याशी खड़े करने पड़ते हैं। पार्टी के उम्मीदवार भले ही चुनाव नहीं जीतते हैं, लेकिन दर्जन भर सीटों पर दस हजार के आस-पास वोट लाकर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हैं। कई बार दूसरों की हार का कारण भी बनते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सबसे अधिक सीटों पर लड़ती है बसपा