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कई दिनों से वाघा बॉर्डर पर रह रहा था हमलावर

कई दिनों से वाघा बॉर्डर पर रह रहा था हमलावर

पाकिस्तान में कल वाघा बॉर्डर पर झंडा उतारने के कार्यक्रम के चंद मिनट बाद हुए भीषण आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर आज 61 हो गई। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले की तहकीकात के तहत भारत-पाक सीमा क्षेत्र से लगभग 20 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस हमले में कल एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इसमें मरने वाले 61 लोगों में 10 महिलाएं, आठ बच्चों और तीन सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। हमले में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और उनका लाहौर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है जहां आपातकालीन स्थिति की घोषणा की गई है।

विस्फोट कल तब हुआ जब बड़ी संख्या में लोग भारत-पाक की मुख्य जमीनी सीमावर्ती क्रॉसिंग पर आयोजित ध्वज उतारने के समारोह में शामिल होने के बाद लौट रहे थे, जहां पंजाब रेंजर्स की भारी तैनाती रहती है। एक युवा आत्मघाती बम हमलावर ने स्थानीय परेड स्थल के मुख्य द्वार के नजदीक शाम छह बजकर तीन मिनट पर खुद को विस्फोटक से उड़ा लिया। इससे वहां हाहाकार मच गया।

पंजाब आपातकालीन राहत सेवा विभाग के प्रवक्ता जाम सज्जाद ने बताया कि वाघा बॉर्डर पर भीषण आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या 61 हो गई है। कुछ घायलों की हालत अब भी गंभीर है और डॉक्टर उनका जीवन बचाने के लिए जूझ रहे हैं। सज्जाद ने कहा कि करीब 43 शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं और शेष की अभी पहचान की जानी है। उन्होंने कहा कि हमने 18 शवों की पहचान के लिए राष्ट्रीय पंजीकरण डाटाबेस प्राधिकरण (नद्र) की मदद मांगी है।

लाहौर पुलिस के प्रवक्ता नियाब हैदर नकवी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने वाघा में आवासीय इलाकों में अभियान छेड़ा है और करीब 20 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस, रेंजर्स और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने घटना की जांच शुरू कर दी है। सेना और रेंजर्स पुलिस के साथ मिलकर लाहौर में आशुरा जुलूसों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे और रविवार को हुए हमले के मद्देनजर उन्हें हाई अलर्ट पर रखा गया है।

पंजाब के गृहमंत्री कर्नल (अवकाशप्राप्त) शुजा खानजादा ने कहा कि आत्मघाती हमलावर का निशाना ध्वजारोहण समारोह का आयोजन स्थल था। उन्होंने कहा कि आत्मघाती हमलावर अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने के लिए परेड अवेन्यू पहुंचना चाहता था, लेकिन वहां पहुंचने में असफल रहने पर उसने मुख्य द्वार के नजदीक खुद को उड़ा लिया।

इस हमले की जिम्मेदारी कम से कम तीन आतंकवादी संगठनों ने ली है। सबसे पहले इसकी जिम्मेदारी अलकायदा से जुड़े और तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अलग होकर बने जनदुल्ला समूह ने ली। इसके तुरंत बाद जमातुल अहरार ने कहा कि इसके आत्मघाती बम हमलावर हाफिज हनीफुल्ला ने इस हमले को अंजाम दिया। इसके बाद माहार मेहसूद नाम के एक संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली।

पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक मुश्ताक अहमद सुखेरा को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार हमलावर की उम्र करीब 20 साल थी। वह कई दिन से वाघा बॉर्डर इलाके में रह रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है, यह भी संदेह है कि आत्मघाती हमलावर के आका भी विस्फोट स्थल के आसपास मौजूद थे, ताकि योजना को अंजाम देना सुनिश्चित किया जा सके।

विस्फोट में करीब 15 से 20 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। इसमें से कुछ हमलावर की जैकेट में था और शेष उसके पास था। हमलावर के शरीर के टुकड़े एकत्र कर लिए गए हैं और उन्हें डीएनए तथा फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस बीच, जमात उद दावा की अनुषंगी फलाह ए इंसानियत ने नौ शवों को चौबुर्जी स्थित अपने मुख्यालय पहुंचाया और इसके एक नेता ने शवों को परिवारों को सौंपे जाने से पहले मृतकों के लिए नमाज ए जनाजा पढ़ाई।

लाहौर के मेयो अस्पताल के अधिकारी मकबूल अहमद ने कहा कि हमने परिजनों के आग्रह पर फलाह ए इंसानियत को नौ शव मस्जिद अल कदीसिया चौबुर्जी ले जाने की अनुमति दे दी क्योंकि वे वहां नमाज ए जनाजा पढ़वाना चाहते थे। पंजाब के कानून मंत्री मुजतबा शुजाउर रहमान ने आत्मघाती हमले को एक सुरक्षा खामी करार दिया। उन्होंने कहा कि रेंजर्स मुख्यालय परिसर में विस्फोट कर देना निश्चित तौर पर सुरक्षा खामी का परिणाम है और यह बहुत भयानक है।

रहमान ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को देखना होगा कि हमलावर किस तरह सुरक्षा परिधियों को पार करते हुए परेड अवेन्यू के मुख्य द्वार तक पहुंच गया। गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को पांच दिन पहले चेतावनी जारी की गई थी कि आत्मघाती हमलावर उनकी इमारतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सुरक्षा का पूरा फोकस मोहर्रम के जुलूसों पर हो गया और वाघा बॉर्डर आतंकवादियों का आसान निशाना बन गया।

एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि शिया विरोधी प्रतिबंधित संगठन-तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और लश्कर ए झांग्वी शिया जुलूसों, विशिष्ट व्यक्तियों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकते हैं। पंजाब रेंजर्स के एक प्रवक्ता ने कहा कि वाघा पर तीन दिन तक आम लोगों के लिए झंडा उतारने का कोई कार्यक्रम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला रविवार के हमले में लोगों के मारे जाने के शोक के चलते लिया गया है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत के बीएसएफ ने भी रेंजर्स को बताया है कि वह भी कार्यक्रम के लिए तीन दिन तक जनता को आमंत्रित नहीं करेगा।

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