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पांच एप, जो आसान बना देंगे हमारी जिंदगी

पांच एप, जो आसान बना देंगे हमारी जिंदगी

तकनीक की कामयाबी तभी है जब वह आपकी जिंदगी को आसान करें। आईआईटी दिल्ली में ‘एपाथन’ नाम से दो दिन चली मोबाइल एप्लीकेशन प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों से इंजीनियरिंग के छात्र आए। इंटरनेशनल इंजीनियर फेडरेशन ने इन छात्रों को ऐसी ही कुछ तकनीक बनाने को कहा, जो आपके तेज रफ्तार जीवन को सुगम बना सकें। छात्रों ने न सिर्फ अपने आइडिया पेश किया बल्कि जज द्वारा आइडिया पसंद आने पर तुरंत एप्लीकेशन भी बना डाला। रोहित पंवार की रिपोर्ट

विज’ से मेमोरी फुल नहीं होगी

इन्होंने बनाया
मेरठ के एमआईईटी कॉलेज के छात्र संचित गोयल और अभिजीत मोहन ने बनाया।

स्मार्टफोन में सबसे बड़ी खामी एप्लीकेशन के अपडेशन की रहती है। इंटरनेट चालू रहने से ऐप खुद अपडेट तो हो जाते हैं लेकिन इसे मेमरी और रैम भर जाती है। इससे फोन धीमा हो जाता है। इस दिक्कत को ‘विज’ ऐप दूर करेगा। इसे इंस्टॉल करने के बाद सभी एप्लीकेशन खुद अपडेट हो जाएंगे। मान लीजिए यदि व्हट्सएप का नया वर्जन आया है तो विज उसे बिना इंटरनेट के प्रयोग के इसे इंस्टाल कर देगा। खास बात यह है कि इससे मोबाइल का स्पेस नहीं भरेगा।
- क्या कहते हैं विशेषज्ञ : आईआईटी दिल्ली के प्रो. उमेश कुमार कहते हैं कि हम सभी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। यदि कोई तकनीक की जानकारी नहीं रखता उसके लिए भी यह खास एप्लीकेशन है।

एक टच पर खाना आएगा

इन्होंने बनाया
गुड़गांव के केआईआईटी कॉलेज के छात्र साहिल सक्सेना और साहिल चौहान ने

क्या आपने ऐसे रेस्तरां की कल्पना की है जहां न वेटर हो और न ही कैशियर। सिर्फ आप हों और एक क्लिक पर आपका मनचाहा खाना टेबल पर आ जाए। इसे सच करने के लिए ‘वेटरलैस रेस्तरां’ एप्लीकेशन बनाया गया है। इसे सिर्फ होटल में पहुंचने पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है। एक क्लिक पर कोई भी व्यंजन का ऑर्डर कर सकते हैं। ऑर्डर लेने कोई वेटर नहीं होगा। खाना खाने के बाद भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है। शैफ की जानकारी भी इस ऐप में होगी।
- क्या कहते हैं विशेषज्ञ : डीयू के कंप्यूटर साइंस के प्रो. अमित भटनागर कहते हैं कि ऐसे प्रयोग हो चुके हैं लेकिन इसमें सबसे खास शैफ का ब्योरा है। ऐसी रोचक एप्लीकेशन को अभी रेस्तरां में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

बिना बोले ‘शोनो’ करा सकता है दुनिया से संवाद

इन्होंने बनाया
दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज के छात्र आदित्य गोपाल गांगुली ने बनाया है यह मोबाइल
एप्लीकेशन मूक-बधिरों को अन्य लोगों से संवाद करने में दिक्कतें आती हैं। इसे देखते हुए ‘शोनो’ एप्लीकेशन तैयार किया गया है। शोनो में ढेरों शब्द व वाक्य डाले गए जो रोजमर्रा में अधिक इस्तेमाल होते हैं। हर शब्दों को एनिमेटेड कार्टून से जोड़ा गया है।
मान लीजिए यदि कोई मूक-बधिर छात्र ये कहना चाहता है, ‘मैं ठीक हूं, आप कैसे हैं?’ ऐसी स्थिति में वह शोनो पर इस वाक्य का चुनाव करेगा। चुनाव करते ही एनिमेटेड कार्टून इस वाक्य को लिपिरिडिंग भाषा में बोलेगा। कार्टून किस तरह से होंठों से इस वाक्य को बोल रहा है, इसे मूक बधिर समझेंगे और बाद में इसे अमल में ला सकते हैं। ऐसा करने से वे आसानी से लिपरिडिंग की भाषा समझकर सभी से संवाद कर सकते हैं।

- क्या कहते हैं विशेषज्ञ : डीयू में इक्वल ऑपरच्यूनिटी सेल के ओएसडी डॉ. अनिल अनेजा कहते हैं कि यह अच्छी पहल है। अक्षम छात्रों के लिए तकनीक का प्रयोग करना चाहिए। इससे उनकी जिंदगी काफी आसान होती है।

ईएमएस से अपने बच्चों की हर हलचल पर रखें नजर

इन्होंने बनाया
नोएडा के इंजीनियरिंग छात्र और हाल में अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी ‘एरिंसस’ खोलने वाले अभिषेक सिद्धू ने तैयार किया।
नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर उनके माता-पिता अधिक चिंतित रहते हैं। इस चिंता को दूर करने के लिए ईएमएस यानी एजेकुशन मैनेजमेंट सिस्टम एप्लीकेशन तैयार किया गया है। इसकी मदद से अभिभावक अपने बच्चों की हलचल पर नजर रख सकते हैं।
इस एप्लीकेशन को बच्चों के स्कूल के आईकार्ड से जोड़ा गया है। आईडी पर एक सीडीएमए चिप लगाई गई है जो मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से ताजा स्थिति व हलचल की जानकारी अपडेट करती है। छात्र कहीं भी जाएं उनकी लोकेशन का नोटिफिकेशन अभिभावकों के मोबाइल पर आता रहेगा। यही नहीं, बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए इसमें विभिन्न विषयों के ऑनलाइन टेस्ट का पाठ्यक्रम भी हैं।

- क्या कहते हैं विशेषज्ञ : इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमने की प्रो. दीप्ती छाबड़ा का कहना है कि इस एप्लीकेशन को छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए तैयार किया गया है। अभिभावक इसका अधिक इस्तेमाल करेंगे।

एक क्लिक से लाइब्रेरी की किताबों की सूची मिलेगी

इन्होंने बनाया
फरीदाबाद स्थित मानव रचना विश्वविद्यालय से हाल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रियांशु मित्तल ने तैयार किया एप्लीकेशन। 

विश्वविद्यालय में पढ़ने-लिखने के काम से लेकर सभी प्रशासनिक काम ज्ञानपोर्ट नाम के मोबाइल एप्लीकेशन से ऑनलाइन किए जा सकते हैं। इससे आप ऐसा अनुभव करेंगे जैसे आप किसी ऑनलाइन विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं। कक्षाएं, टाइम टेबल से लेकर उपस्थिति दर्ज आदि कार्य छात्र ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं।
छात्र एक क्लिक पर जान सकते हैं कि कॉलेज की लाइब्रेरी में कौन सी किताब उपलब्ध है, कौन सी नहीं। यदि किसी शिक्षक को 100 छात्रों वाली कक्षा में से सिर्फ 20 छात्रों के समूह को कोई जानकारी देनी है या नोटिस भेजना है तो ये काम भी ज्ञानपोर्ट से संभव है। अभिभावक अपने मोबाइल पर छात्र के परियोजनाएं व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

- क्या कहते हैं विशेषज्ञ : डीयू के एसओएल के निदेशक सीएस दुबे का कहना है कि दुनियाभर में सभी विश्वविद्यालय ऑनलाइन पढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में यह एप्लीकेशन सभी के लाभदायक है। ऐसे और भी प्रयोग होने चाहिए।

 

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