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त्योहारों के बीच जोर नहीं पकड़ रही चुनावी लहर

विधानसभा चुनाव के तहत प्रमुख पार्टियों में गंठबंधन और तालमेल के प्रयासों के बीच त्योहारों की बहार आई हुई है। इस कारण चुनावी लहर जोर नहीं पकड़ रही है। मसीही समाज ऑल सोल डे, मुस्लिम समुदाय मुहर्रम, सिख समुदाय गुरु नानक देव के प्रकाशोत्सव और सनातम धर्मावलंबी कार्तिक पूर्णिमा को लेकर व्यस्त चल रहे हैं। वहीं शुभ लग्न पर भी चुनाव का संभावित प्रभाव दिख रहा है।

आचार संहिता का डर
चुनावी समर में कूदने वाले राजनेता आदर्श आचार संहिता लागू होने के खौफ में भी हैं। मुहर्रमी जुलूस, नगर कीर्तन और कार्तिक पूर्णिमा समारोह में शामिल होने से पहले कई बार सोच रहे हैं। कहीं किसी प्रकार का नियमावली उल्लंघन का आरोप न लग जाये। हालांकि, इतना तय है कि प्रमुख प्रत्याशी समाज के लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
खामोश मतदाता हैं गंभीर
लौहनगरी के खामोश मतदाता गंभीर हो गए हैं। इनमें अधिकांश नई पीढ़ी के वोटर चुनावी हलचल पर निगाह रखे हुए हैं। लोकसभा चुनाव में युवा पीढ़ी के उत्साह से संभावना तेज हुई है कि विधानसभा चुनाव में इनकी जागरूक प्रवृत्ति रंग दिखाएगी।

 

 

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